Indian Overseas Bank का कमाल! ₹20,000 करोड़ का नुकसान किया खत्म, अब ₹5,000 करोड़ जुटाने की तैयारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Overseas Bank का कमाल! ₹20,000 करोड़ का नुकसान किया खत्म, अब ₹5,000 करोड़ जुटाने की तैयारी

इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने अपने ₹20,000 करोड़ के जमा हुए नुकसान को पूरी तरह से खत्म कर दिया है, जिससे भविष्य में डिविडेंड (Dividend) देने का रास्ता साफ हो गया है। यह सरकारी बैंक अब अपने कैपिटल बेस को मजबूत करने के लिए फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) के उत्तरार्ध में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए ₹5,000 करोड़ तक जुटाने की योजना बना रहा है।

Detailed Coverage

₹20,000 करोड़ का नुकसान खत्म, डिविडेंड का रास्ता साफ

इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने एक बड़ी वित्तीय उपलब्धि हासिल करते हुए अपने लगभग ₹20,000 करोड़ के जमा हुए नुकसान को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। यह बैलेंस शीट की रिकवरी बैंक के लिए 2014 से 2020 के मुश्किल दौर के बाद आई है, जब यह पब्लिक सेक्टर बैंक लगातार घाटे में चल रहा था। हाल के वर्षों में लगातार नेट प्रॉफिट (Net Profit) कमाने की बदौलत, बैंक ने इन ऐतिहासिक रेड एंट्रीज को सफलतापूर्वक साफ कर दिया है। इस सफलता के बाद अब बैंक अपने शेयरधारकों (Shareholders) को डिविडेंड (Dividend) देने पर विचार कर सकता है।

कैपिटल बढ़ाने की तैयारी: ₹5,000 करोड़ का QIP

इस बेहतर वित्तीय स्थिति का फायदा उठाते हुए, बैंक ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए ₹5,000 करोड़ तक जुटाने की योजना की घोषणा की है। इस प्रक्रिया में म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) और बीमा कंपनियों जैसे इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Institutional Investors) को शेयर बेचे जाते हैं। बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (Board of Directors) ने इस योजना को पहले ही मंजूरी दे दी है, और अब बैंक जरूरी रेगुलेटरी और स्टेट्यूटरी क्लीयरेंस (Regulatory and Statutory Clearances) का इंतजार कर रहा है। मैनेजमेंट का इरादा 2027 फाइनेंशियल ईयर (FY27) की तीसरी या चौथी तिमाही के दौरान फंड रेज (Fundraise) को पूरा करने का है, संभवतः इसे छोटे ट्रAnche (Tranches) में बांटा जाएगा।

यह कदम बैंक की ओनरशिप स्ट्रक्चर (Ownership Structure) के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार वर्तमान में बैंक में 92.44% हिस्सेदारी रखती है। हालांकि पब्लिक सेक्टर बैंकों को अक्सर विशेष छूट मिलती है, सरकार धीरे-धीरे अपनी बहुमत हिस्सेदारी कम करके सेबी (SEBI) की उस आवश्यकता के करीब आना चाहती है, जिसके तहत लिस्टेड कंपनियों को 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग (Public Shareholding) बनाए रखनी होती है।

हालिया वित्तीय प्रदर्शन

बैंक ने जून 2026 तिमाही के लिए मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। इस अवधि में नेट प्रॉफिट (Net Profit) पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 49.32% बढ़कर ₹1,659 करोड़ हो गया। ब्याज से होने वाली कोर इनकम (Core Income) में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई, जिसमें नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) 34.3% बढ़कर ₹3,688 करोड़ रही। इस प्रदर्शन का एक मुख्य कारण ब्याज मार्जिन (Interest Margins) का विस्तार है, जिसमें बैंक का डोमेस्टिक नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Domestic Net Interest Margin) पिछले साल के 3.17% से बढ़कर 3.48% हो गया। इससे पता चलता है कि बैंक अपनी जमाओं पर दिए जाने वाले ब्याज की तुलना में अपने दिए गए लोन पर बेहतर रिटर्न कमा रहा है।

लेंडिंग स्ट्रैटेजी और ग्रोथ ड्राइवर्स

IOB ने रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME लेंडिंग (Lending) पर काफी ध्यान केंद्रित किया है, जो अब उसके कुल लोन पोर्टफोलियो (Loan Portfolio) का लगभग 80% है। रिटेल एडवांसेज (Retail Advances) में 36.49% की तेज वृद्धि देखी गई, जो जून 2026 के अंत तक ₹96,637 करोड़ तक पहुंच गया। बैंक का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो (Gold Loan Portfolio) एक महत्वपूर्ण संपत्ति बना हुआ है, जिसका मूल्य वर्तमान में लगभग ₹1.26 ट्रिलियन है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि यह खास सेगमेंट FY27 में 30% से 35% की दर से बढ़ता रहेगा। निवेशक आने वाले महीनों में बैंक की मार्जिन बनाए रखने और अपनी एसेट क्वालिटी (Asset Quality) का प्रबंधन करने की क्षमता पर नजर रखेंगे, क्योंकि वह अपने लोन बुक का विस्तार कर रहा है और QIP के अंतिम निष्पादन की ओर बढ़ रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.