भारत की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1) में शानदार प्रदर्शन किया है। पावर फाइनेंसर्स को छोड़कर, इन कंपनियों का नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) **36.9%** बढ़ा है। वहीं, एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भी लगभग **19%** का उछाल देखा गया है।
सेक्टर्स में दिखी मिली-जुली तस्वीर
हालांकि, कुल मिलाकर NBFCs का प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन विभिन्न सेक्टर्स में ग्रोथ की रफ्तार में बड़ा अंतर देखने को मिला। व्हीकल फाइनेंस (Vehicle Finance) यानी वाहन लोन देने वाली कंपनियों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, जहां AUM ग्रोथ बढ़कर 16.8% हो गई। वहीं, हाउसिंग फाइनेंस (Housing Finance) सेगमेंट में ग्रोथ घटकर 5.6% रह गई। इस नरमी को देखते हुए LIC Housing Finance जैसी कंपनियों ने अपना लोन ग्रोथ का अनुमान घटाकर 8-10% कर दिया है, जो पहले 10-12% था।
मार्जिन पर दबाव, क्या है वजह?
वॉल्यूम ग्रोथ अच्छी होने के बावजूद, NBFCs के मुनाफे (Profitability Margins) पर दबाव बढ़ रहा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि गोल्ड लोन (Gold Loan) और अफोर्डेबल हाउसिंग (Affordable Housing) सेगमेंट में यील्ड कम्प्रेशन (Yield Compression) यानी ब्याज दरों में कमी एक बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और गोल्ड लोन नियमों में बदलाव का असर इन सेक्टर्स पर दिख रहा है। कुछ कंपनियों ने उम्मीद से ज्यादा मार्जिन में कमी देखी है।
पावर फाइनेंस पर चिंता, ब्रोकरेज ने किया डाउनग्रेड
पावर फाइनेंस (Power Finance) सेगमेंट सबसे ज्यादा चुनौतियों का सामना कर रहा है, जहां लोन बुक ग्रोथ सिर्फ 2.3% रही। इसी को ध्यान में रखते हुए, ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने PFC और REC जैसी बड़ी पावर फाइनेंस कंपनियों को 20 अगस्त, 2026 को डाउनग्रेड कर दिया। यह कदम इन कंपनियों के लॉन्ग-टर्म लोन ग्रोथ आउटलुक को लेकर निवेशकों की सतर्कता को दिखाता है।
आगे क्या देखें?
आगे निवेशकों की नजर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins) की स्थिरता पर रहेगी। अभी एसेट क्वालिटी (Asset Quality) की स्थिति ठीक है, लेकिन रेगुलेटरी जांच जारी है। खास तौर पर गोल्ड और अफोर्डेबल हाउसिंग पोर्टफोलियो में यील्ड कैसे बनी रहेगी, इस पर मैनेजमेंट के कमेंट्री पर ध्यान देना होगा। इसके अलावा, RBI की नीतियां भी NBFCs के भविष्य के लोन डिस्बर्समेंट और मुनाफे को प्रभावित कर सकती हैं।
