RBI द्वारा रेपो रेट को **5.5%** करने के बाद से भारतीय म्यूचुअल फंड्स ने अपने पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव किया है। रिस्क से बचने के लिए फंड मैनेजर्स सरकारी बॉन्ड्स बेचकर शॉर्ट-टर्म कॉर्पोरेट डेट की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।
जुलाई से अब तक भारतीय म्यूचुअल फंड्स ने करीब $4.5 बिलियन मूल्य के सरकारी बॉन्ड बेचे हैं। इसकी मुख्य वजह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति में आया बदलाव है। 7 अक्टूबर, 2026 को RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% कर दिया, जिसका मकसद महंगाई पर काबू पाना है।
बॉन्ड यील्ड और पोर्टफोलियो पर असर
इस नीति का सीधा असर बॉन्ड मार्केट पर पड़ा है, जहां 10-year सरकारी सिक्योरिटी की यील्ड बढ़कर 7.25% के आसपास पहुंच गई है। बॉन्ड मार्केट के नियम के मुताबिक, यील्ड बढ़ने पर कीमतों में गिरावट आती है, जिससे मौजूदा लॉन्ग-टर्म होल्डिंग्स की वैल्यू पर चोट पड़ती है। फंड मैनेजर्स इसी नुकसान को कम करने के लिए इन सिक्योरिटीज को बेच रहे हैं।
शॉर्ट-टर्म डेट की ओर बढ़ता रुझान
अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियां तेजी से अपनी पूंजी को सुरक्षित और कम अवधि वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लगा रही हैं। वे 10 साल से ज्यादा मैच्योरिटी वाले बॉन्ड्स के बजाय 1 से 3 साल की मैच्योरिटी वाले उच्च गुणवत्ता वाले कॉर्पोरेट डेट में निवेश कर रही हैं। इस रणनीति का मकसद 'ड्यूरेशन रिस्क' को कम करना है ताकि RBI द्वारा भविष्य में और रेट बढ़ाने की स्थिति में पोर्टफोलियो की वैल्यू सुरक्षित रहे।
निवेशकों के लिए जोखिम
डेट-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स रखने वाले निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। विशेषकर लॉन्ग-ड्यूरेशन डेट फंड्स पर इस बढ़ते ब्याज दर चक्र (Interest Rate Cycle) का सबसे बुरा असर पड़ने की संभावना है। अगर महंगाई दर ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो बॉन्ड यील्ड और ऊपर जा सकती है, जिससे फिक्स्ड इनकम फंड्स के लिए स्थिर रिटर्न देना चुनौतीपूर्ण होगा। अब बाजार की नजरें आने वाली महंगाई की रिपोर्ट और RBI की अगली कमेंट्री पर टिकी हैं।
