घरेलू बाजार में सुस्ती के चलते भारतीय निवेशकों का रुझान ग्लोबल इक्विटीज की तरफ बढ़ा है। निवेशकों ने अब तक **$2.3 बिलियन** का निवेश विदेशी बाजारों में किया है, जिसमें GIFT City का बड़ा योगदान है। हालांकि, ऊंचे प्रीमियम पर मिल रहे ETFs को लेकर सतर्क रहना जरूरी है।
ग्लोबल मार्केट की ओर क्यों भाग रहे निवेशक?
घरेलू बाजार में गिरावट से परेशान निवेशकों ने अब ग्लोबल ग्रोथ की ओर रुख किया है। पिछले दो वर्षों में Nifty 50 में 5.3% की गिरावट आई है, जबकि इसके उलट S&P 500 और MSCI Emerging Markets Index ने क्रमशः 32% और 47% की जबरदस्त ग्रोथ दिखाई है। भारतीय निवेशक अब विशेष रूप से AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सेक्टर में एक्सपोजर चाहते हैं, जो विदेशी बाजारों में तेजी से बढ़ रहा है।
GIFT City का गेम-चेंजर रोल
RBI ने घरेलू म्यूचुअल फंड्स के लिए $7 बिलियन की इन्वेस्टमेंट लिमिट तय कर रखी है, जिसके कारण कई पॉपुलर फंड्स ने नए निवेश को बंद कर दिया है। इसे देखते हुए एसेट मैनेजर्स अब GIFT City का सहारा ले रहे हैं। JioBlackRock, HDFC Asset Management, Parag Parikh और Aditya Birla Sun Life जैसे बड़े प्लेयर्स ने इसी के जरिए नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं, जिससे निवेशक विदेशी कैप्स को बायपास कर सकें।
निवेश में छिपे खतरे
अगर आप भी विदेश में निवेश कर रहे हैं, तो इन दो बातों का ध्यान रखें:
- ETF प्रीमियम का जाल: स्थानीय स्तर पर लिस्टेड फॉरेन ETFs की सप्लाई कम है, जिससे वे अपनी असली NAV (नेट एसेट वैल्यू) से 80% तक के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। अगर डिमांड कम होती है या सप्लाई बढ़ती है, तो आपका पैसा डूब सकता है।
- करेंसी रिस्क: अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश करना डॉलर और रुपए के उतार-चढ़ाव पर भी निर्भर करता है। अगर रुपया मजबूत होता है, तो आपके रिटर्न पर इसका सीधा बुरा असर पड़ सकता है।
निवेशकों को सलाह है कि वे केवल ग्लोबल मार्केट की चमक न देखें, बल्कि इन फंड्स की कॉस्ट, रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स और करेंसी रिस्क को पूरी तरह समझकर ही कदम उठाएं।
