Bajaj Life और SBI Life जैसी बड़ी इंश्योरेंस कंपनियां अपने पोर्टफोलियो का रिटर्न बढ़ाने के लिए प्राइवेट क्रेडिट फंड्स में निवेश बढ़ा रही हैं। इसके लिए वे रेग्युलेटर IRDAI से निवेश की सीमा को **3%** से बढ़ाकर **5%** करने की पैरवी कर रही हैं।
पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव
भारतीय इंश्योरेंस कंपनियां अपनी पूंजी प्रबंधन की रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही हैं। Bajaj Life Insurance और Bajaj General Insurance ने ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट व्हीकल्स (AIV) में अपना निवेश काफी बढ़ाया है, जो दो साल पहले ₹200 करोड़ था और अब बढ़कर ₹650 करोड़ हो गया है। SBI Life Insurance भी इस राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है, जो सरकारी सिक्योरिटीज और हाई-रेटेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स पर निर्भरता को कम करने का संकेत है।
क्यों बढ़ रहा है आकर्षण?
बदलते इंटरेस्ट रेट माहौल में पॉलिसीहोल्डर्स को बेहतर रिटर्न देने का दबाव कंपनियों पर है। पहले कंपनियां सुरक्षित लेकिन कम रिटर्न वाले इंस्ट्रूमेंट्स में पैसा लगाती थीं, लेकिन अब बेहतर इनकम के लिए प्राइवेट क्रेडिट की ओर रुख कर रही हैं।
रेग्युलेटर से क्या है उम्मीद?
मौजूदा नियमों के तहत, इंश्योरेंस कंपनियां अपने शेयरहोल्डर्स फंड का केवल 3% हिस्सा ही ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट में लगा सकती हैं। इंडस्ट्री लीडर्स इस लिमिट को बढ़ाकर 5% करने की मांग कर रहे हैं, ताकि वे लंबी अवधि की देनदारियों को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकें।
निवेश से जुड़े रिस्क
यह कदम जहां रिटर्न बढ़ाने के लिए है, वहीं इसमें रिस्क भी ज्यादा है। सरकारी बॉन्ड्स के मुकाबले प्राइवेट क्रेडिट में लिक्विडिटी कम होती है और डिफॉल्ट का जोखिम ज्यादा रहता है। अगर उधार लेने वाली कंपनियां पैसा नहीं चुका पातीं, तो इंश्योरेंस कंपनियों की वित्तीय सेहत पर इसका असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें IRDAI के फैसले पर टिकी हैं कि क्या रेग्युलेटर इस मांग को मंजूरी देता है या नहीं।
