भारत का इंश्योरेंस सेक्टर नए अकाउंटिंग स्टैंडर्ड Ind AS 117 को अपनाने की ओर बढ़ रहा है। फिलहाल केवल **11** कंपनियां ही **FY27** तक इसके लिए तैयार हैं, जबकि Life Insurance Corporation of India जैसे बड़े प्लेयर्स को तकनीकी चुनौतियों के चलते **1** साल का एक्स्टेंशन मिला है।
भारत का इंश्योरेंस सेक्टर इस समय फाइनेंशियल रिपोर्टिंग के एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। Ind AS 117 का मकसद ग्लोबल IFRS 17 बेंचमार्क के अनुरूप पारदर्शिता लाना है, ताकि इंश्योरेंस सर्विस से होने वाले मुनाफे और इन्वेस्टमेंट रिटर्न को अलग-अलग देखा जा सके। मौजूदा नियमों में ये दोनों चीजें एक साथ रिपोर्ट होती हैं, जिससे वास्तविक प्रॉफिट का पता लगाना मुश्किल होता है।
सिस्टम ओवरहाल की चुनौतियां
यह बदलाव सिर्फ रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कंपनियों के डेटा मैनेजमेंट और कॉन्ट्रैक्ट वैल्यूएशन को पूरी तरह बदल देगा। सबसे बड़ी मुश्किल Contractual Service Margin को लेकर है। नए नियमों के तहत, इंश्योरेंस कॉन्ट्रैक्ट से होने वाले संभावित मुनाफे को समय के साथ बांटकर दिखाना होगा, जबकि नुकसान की स्थिति में उसे तुरंत रिकॉग्नाइज करना अनिवार्य होगा।
पुरानी कंपनियों के लिए दशकों पुराना डेटा और जटिल पोर्टफोलियो बड़ी बाधा बना हुआ है, जबकि नई और डिजिटल-फ्रेंडली कंपनियों के लिए यह काम आसान है। फिलहाल Acko Life और Tata AIA Life जैसी कंपनियां FY27 तक इस बदलाव के लिए तैयार हो चुकी हैं।
रेगुलेटर की सख्ती और राहत
Life Insurance Corporation of India सहित कई बड़ी कंपनियों ने Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) से अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसे मंजूरी मिल गई है। हालांकि, रेगुलेटर इन कंपनियों से हर महीने प्रोग्रेस रिपोर्ट मांग रहा है ताकि सिस्टम अपग्रेड को समय पर पूरा किया जा सके।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
फिलहाल वैल्यूएशन पर इसका कोई बड़ा असर नहीं दिखेगा। अगले 2-3 सालों तक Embedded Value और Value of New Business ही निवेश का मुख्य आधार रहेंगे। निवेशक अभी इन कंपनियों के ऑपरेशनल प्रोग्रेस और आईटी स्टेबिलिटी पर नजर रखें, क्योंकि यही भविष्य में इनके पारदर्शिता स्तर को तय करेगी।
