IPO Market: इन्वेस्टमेंट बैंकों की हुई चांदी, केवल दो महीनों में कमा लिए **₹1,000 करोड़**

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
IPO Market: इन्वेस्टमेंट बैंकों की हुई चांदी, केवल दो महीनों में कमा लिए **₹1,000 करोड़**

जुलाई और अगस्त 2026 में इन्वेस्टमेंट बैंकों ने अंडरराइटिंग फीस के जरिए **₹1,000 करोड़** से ज्यादा की कमाई की है। SEBI की **30 सितंबर** की डेडलाइन से पहले IPO लाने की होड़ ने इस मुनाफे को आसमान पर पहुंचा दिया है।

भारतीय इन्वेस्टमेंट बैंकों के लिए चालू साल की दूसरी तिमाही बेहद शानदार रही है। जुलाई और अगस्त के केवल दो महीनों में ही इन्होंने ₹1,000 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है। तुलना करें तो, साल की पहली तिमाही में यह आंकड़ा महज ₹132.90 करोड़ पर था। इस उछाल के पीछे प्राइमरी मार्केट में मची अफरा-तफरी मुख्य कारण है।

SEBI की डेडलाइन का असर

बाजार में IPO की इस बाढ़ के पीछे सबसे बड़ा हाथ रेगुलेटर की डेडलाइन का है। जिन कंपनियों के पास पहले से SEBI की मंजूरी थी लेकिन वे सही समय का इंतजार कर रही थीं, अब उन्हें 30 सितंबर, 2026 तक बाजार में उतरना अनिवार्य हो गया है। इस 'रेगुलेटरी बोतलनेक' की वजह से कंपनियां अपनी प्लानिंग को जल्दबाजी में पूरा कर रही हैं।

फंडरेजिंग के आंकड़े

पिछले दो महीनों में 33 कंपनियों ने IPO लॉन्च किए हैं, जिन्होंने करीब ₹49,592 करोड़ जुटाए हैं। इसमें Manipal Health Enterprises जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिसने अकेले ₹165 करोड़ से ज्यादा की फीस का योगदान दिया है।

निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?

घरेलू म्यूचुअल फंड्स का पैसा लगातार आने से IPO को सब्सक्राइब करने में मदद मिल रही है, लेकिन अब कंपनियां भी सतर्क हो रही हैं। वे अपने इश्यू साइज को छोटा कर रही हैं और वैल्यूएशन को एडजस्ट कर रही हैं। सबसे बड़ा रिस्क 160 से ज्यादा कंपनियों की बची हुई पाइपलाइन है, जो ₹4 लाख करोड़ से ज्यादा जुटाने की तैयारी में हैं। अगर बाजार में सप्लाई इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले समय में निवेशकों की भूख (Appetite) कम हो सकती है, जिससे मार्केट पर दबाव बढ़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.