सरकार अक्टूबर के अंत तक एक 10-सदस्यीय कमेटी का गठन करने जा रही है, जिसका उद्देश्य भारत के फाइनेंशियल सेक्टर को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार करना है।
भारत सरकार अक्टूबर के अंत तक एक हाई-लेवल बैंकिंग कमेटी का गठन करने की तैयारी में है। इस पैनल में Reserve Bank of India (RBI), फिनटेक इंडस्ट्री और Indian Banks' Association के एक्सपर्ट्स शामिल होंगे, जिनका मुख्य काम देश के फाइनेंशियल सिस्टम को 2047 के आर्थिक लक्ष्यों के लिए तैयार करना है।
कमेटी का मुख्य एजेंडा
इस पैनल का दायरा काफी बड़ा है। यह कमेटी न केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बैंकिंग में एकीकरण पर काम करेगी, बल्कि क्लाइमेट-रिलेटेड फाइनेंशियल रिस्क और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी रोडमैप तैयार करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही संकेत दिए हैं कि बैंकिंग सेक्टर इन ढांचागत बदलावों को अपनाने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
कंसोलिडेशन और गवर्नेंस पर जोर
कमेटी का एक बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (Economic Advisory Council) की सिफारिशों पर आधारित होगा। इसमें बैंकों के विलय (Consolidation) के जरिए बड़े वैश्विक संस्थान बनाने, बेहतर डिपॉजिट मोबिलाइजेशन और सख्त गवर्नेंस प्रोटोकॉल लागू करने पर फोकस किया जाएगा। इसका सीधा असर इंफ्रास्ट्रक्चर लेंडिंग और SME सेक्टर को मिलने वाले क्रेडिट पर पड़ेगा।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और मौके
हालांकि यह पहल लॉन्ग टर्म में डिजिटल एडॉप्शन और रिस्क मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगी, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। AI को अपनाने के लिए साइबर-डिफेंस में भारी निवेश की जरूरत होगी। वहीं, बैंकों के मर्जर से शॉर्ट-टर्म में लेबर इश्यूज और कॉर्पोरेट कल्चर के बीच तालमेल बिठाना एक चुनौती हो सकता है। इसके अलावा, SME सेक्टर में क्रेडिट विस्तार के साथ बैड लोन (Bad Loans) पर लगाम लगाना भी बैंकों के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
