जुलाई 2026 में भारतीय कंपनियों ने एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के जरिए **$7.70 बिलियन** जुटाने का प्रस्ताव रखा है, जो कि पिछले महीने के मुकाबले **27%** ज्यादा है। RBI द्वारा सालाना लिमिट को बढ़ाकर **$1 बिलियन** करने के बाद विदेशी फंडिंग में यह उछाल देखा गया है।
RBI ने फरवरी 2026 में ECB फ्रेमवर्क में बड़े बदलाव किए थे। ऑटोमैटिक रूट के तहत सालाना लिमिट को $750 मिलियन से बढ़ाकर $1 बिलियन कर दिया गया है। साथ ही, 'ऑल-इन-कॉस्ट' सीलिंग को हटाने से कंपनियां अब अपनी क्रेडिट प्रोफाइल के हिसाब से सीधे लेंडर्स से ब्याज दरों पर बातचीत कर सकती हैं।
कौन सी कंपनियां हैं दौड़ में?
इस विदेशी कर्ज की होड़ में Housing and Urban Development Corp (HUDCO) सबसे आगे है, जिसने $1.56 बिलियन का प्रस्ताव दिया है। एविएशन सेक्टर में भी बड़ी हलचल है, जहाँ Air India और InterGlobe Aviation (IndiGo) ने मिलकर $780 मिलियन की विदेशी फंडिंग की मांग की है। इनके अलावा Tata Capital, Flipkart Internet और RRP Electronics जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम और सलाह
विदेशी बाजार से सस्ता कर्ज मिलना अच्छी खबर हो सकती है, लेकिन इसमें 'करेंसी रिस्क' भी छिपा है। अगर रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो कर्ज चुकाने की लागत बढ़ सकती है। निवेशकों को कंपनियों की हेजिंग (Hedging) स्ट्रैटेजी और अनहेज्ड डेट (Unhedged Debt) पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर कंपनी के नेट प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकता है।
अगले कुछ महीनों में यह देखना अहम होगा कि इन प्रस्तावों में से कितनी रकम वास्तव में लोन के रूप में ली जाती है और मैनेजमेंट आने वाली तिमाही नतीजों में इसे लेकर क्या कमेंट्री देता है।
