Experian और Forrester की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में **66%** कंपनियां फाइनेंशियल फ्रॉड (Financial Fraud) के कारण बड़े नुकसान का सामना कर रही हैं। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते चलन के बीच फ्रॉड के नए और जटिल तरीके बैंकों और कर्जदाताओं की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
भारत में फाइनेंशियल संस्थानों के लिए डिजिटल फ्रॉड एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 66% संगठनों ने माना है कि फ्रॉड की वजह से उनका नुकसान बढ़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि 62% सीनियर डिसीजन-मेकर्स का कहना है कि पिछले एक साल में उन्होंने हमलों की संख्या में काफी बढ़ोतरी देखी है।
क्यों फेल हो रहे हैं पुराने सिस्टम?
डिजिटल-फर्स्ट दौर में 'ऑथोराइज्ड पुश पेमेंट फ्रॉड' जैसे हमले सबसे खतरनाक साबित हो रहे हैं, जहां हमलावर लोगों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए झांसे में ले लेते हैं। ज्यादातर कंपनियां अभी भी पुराने और स्टैटिक सिक्योरिटी सिस्टम पर निर्भर हैं, जो आधुनिक फ्रॉड के तरीकों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
इन्वेस्टर्स के नजरिए से देखें, तो इन कंपनियों को अब साइबर सिक्योरिटी और एडवांस्ड डिटेक्शन सिस्टम पर अपना खर्च (Spending) बढ़ाना होगा। हालांकि यह सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन इससे कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
लोन सेगमेंट और राज्यों की स्थिति
फ्रॉड का जोखिम अलग-अलग लोन सेगमेंट में अलग है। क्रेडिट कार्ड्स (Credit Cards) इस समय सबसे ज्यादा रिस्क वाले सेगमेंट बने हुए हैं, जबकि टू-व्हीलर लोन के मामले में सिक्योरिटी काफी मजबूत दिख रही है। वहीं, भौगोलिक स्तर पर देखें तो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, यूपी और पश्चिम बंगाल में फ्रॉड पकड़ने की दर 10% से ज्यादा है, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में यह दर 8% से भी कम है। आने वाले समय में कंपनियां अपने सिक्योरिटी मॉडल्स को इस क्षेत्रीय असमानता के हिसाब से बदलने पर मजबूर होंगी।
