भारतीय कंपनियां अब सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए विदेशों में जमकर खरीदारी कर रही हैं। साल 2026 में अब तक आउटबाउंड डील का आंकड़ा **$24 बिलियन** तक पहुंच गया है, जबकि घरेलू IPO मार्केट की रफ्तार **$9.9 बिलियन** पर सुस्त पड़ी है।
अपनी ग्रोथ स्ट्रैटेजी को धार देने के लिए भारतीय कॉर्पोरेट्स अब सीमाओं के पार देख रहे हैं। 2026 की पहली छमाही में भारतीय कंपनियों ने $24 बिलियन के विदेशी अधिग्रहण पूरे किए हैं। इस बदलाव की मुख्य वजह ऊर्जा के साधन और क्रिटिकल मिनरल्स (critical minerals) पर सीधा कंट्रोल हासिल करना है, ताकि ग्लोबल ट्रेड में किसी भी तरह की रुकावट का असर कामकाज पर न पड़े।
Sun Pharma का बड़ा फैसला
मजबूत फाइनेंशियल स्थिति वाली कंपनियां कर्ज या इक्विटी जुटाकर इन इंटरनेशनल डील्स को अंजाम दे रही हैं। उदाहरण के तौर पर, Sun Pharmaceuticals ने अमेरिका स्थित Organon & Co को $11.75 बिलियन में खरीदने का करार किया है। हालांकि, निवेशकों को इस पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां इन बड़े अधिग्रहणों के लिए लिए गए कर्ज को कैसे मैनेज करती हैं, क्योंकि भारी कर्ज मुनाफे पर दबाव डाल सकता है।
IPO मार्केट में मायूसी
एक तरफ जहां विदेशी डील रिकॉर्ड स्तर पर हैं, वहीं घरेलू IPO मार्केट में सुस्ती देखी जा रही है। 21 सितंबर 2026 तक कंपनियों ने IPO के जरिए सिर्फ $9.9 बिलियन जुटाए हैं, जो कि 2025 की समान अवधि के $21.8 बिलियन के मुकाबले काफी कम है। ऐसा लग रहा है कि कंपनियां बाजार की बेहतर स्थितियों का इंतजार कर रही हैं।
आगे क्या उम्मीद है?
बाजार को अब बड़े लिक्विडिटी इवेंट्स का इंतजार है। National Stock Exchange और Reliance Jio Platforms की संभावित लिस्टिंग पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जो घरेलू IPO मार्केट में नई जान फूंक सकते हैं। निवेशकों के लिए आने वाले कुछ महीने यह देखने के लिए अहम होंगे कि क्या ये विदेशी अधिग्रहण कंपनियों को मजबूती देते हैं या घरेलू बाजार में फिर से तेजी लौटती है।
