2026 की पहली छमाही में भारतीय फिनटेक सेक्टर ने ₹2 अरब की इक्विटी फंडिंग जुटाई है, जो पिछले दो सालों में सबसे ज़्यादा है। यह बढ़ोतरी कुछ बड़े, लेट-स्टेज (late-stage) डील्स की वजह से हुई है, जबकि शुरुआती स्टेज की फंडिंग लगातार घट रही है, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
फिनटेक सेक्टर में ₹2 अरब की रिकॉर्ड फंडिंग
2026 की पहली छमाही (H1 2026) में भारतीय फिनटेक सेक्टर ने इक्विटी फंडिंग के ज़रिए ₹2 अरब जुटाए हैं। यह पिछले दो सालों में सबसे मज़बूत प्रदर्शन रहा है। हालांकि, यह बढ़ोतरी पूरे सेक्टर में एक समान नहीं है, बल्कि कुछ चुनिंदा बड़ी डील्स का नतीजा है।
लेट-स्टेज डील्स का दबदबा
खासकर लेट-स्टेज फंडिंग में भारी उछाल देखा गया, जो 2025 की दूसरी छमाही की तुलना में 331% बढ़कर $1.6 अरब तक पहुंच गई। इस तेज़ी के पीछे तीन बड़ी डील्स का हाथ है, जिनमें प्रत्येक $100 मिलियन से ज़्यादा की थी। इनमें CRED का $900 मिलियन का सीरीज़ H राउंड, KreditBee का $220 मिलियन का सीरीज़ E, और Weaver का $156 मिलियन का सीरीज़ D राउंड शामिल हैं। इन डील्स ने कुल जुटाई गई राशि का एक बड़ा हिस्सा बनाया।
शुरुआती स्टेज की कंपनियों के लिए मुश्किल
इसके विपरीत, नई और छोटी कंपनियों के लिए हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। सीड-स्टेज फंडिंग में 19% की गिरावट आई, और अर्ली-स्टेज फंडिंग पिछले छह महीनों की तुलना में 41% तक गिर गई। 2025 की पहली छमाही से तुलना करें तो दोनों कैटेगरी में 40% से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। इससे साफ है कि स्थापित कंपनियां भले ही आसानी से पैसा जुटा पा रही हों, लेकिन निवेशक नए बिज़नेस मॉडल पर पैसा लगाने में झिझक रहे हैं।
निवेशकों का रुख और एग्जिट ट्रेंड
इस दौरान निवेशकों का व्यवहार भी अलग-अलग नज़र आया। Inflection Point Ventures और We Founder Circle जैसी फर्मों ने सीड लेवल पर सक्रियता दिखाई, लेकिन लेट-स्टेज फंडिंग मुख्य रूप से Evolvence India जैसे कुछ चुनिंदा निवेशकों पर निर्भर रही।
एग्जिट (Exit) के माहौल में भी बदलाव के संकेत हैं। अधिग्रहण (Acquisitions), जो शुरुआती निवेशकों के लिए पैसा निकालने का एक तरीका है, धीमे पड़ गए हैं। 2026 की पहली छमाही में जहां 7 अधिग्रहण हुए, वहीं पिछले साल इसी अवधि में 16 हुए थे। इन अधिग्रहणों का औसत डील वैल्यू भी कम हुआ है, जिसमें सबसे बड़ा Oxyzo द्वारा GoldenPi का $4.4 मिलियन में अधिग्रहण था। हालांकि, पब्लिक मार्केट्स (Public Markets) ग्रोथ और एग्जिट के लिए एक नया रास्ता दे रहे हैं। Turtlemint और Kissht जैसी कंपनियों ने इस छमाही में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) सफलतापूर्वक पूरी कीं, जो स्थापित फिनटेक कंपनियों के लिए पब्लिक लिस्टिंग को एक व्यवहारिक लक्ष्य बना रहा है।
क्षेत्रीय आंकड़े और बाज़ार का नज़रिया
बेंगलुरु फिनटेक हब बना हुआ है, जिसने 2026 की पहली छमाही में कुल फिनटेक फंडिंग का 70% हिस्सा हासिल किया, जो 2025 की दूसरी छमाही के 31% से काफी ज़्यादा है। मुंबई और गुरुग्राम क्रमशः 17% और 9% के साथ पीछे रहे। जैसे-जैसे सेक्टर 2026 की दूसरी छमाही में आगे बढ़ेगा, निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि लेट-स्टेज फंडिंग की यह गति शुरुआती स्टेज की स्टार्टअप्स तक फैल पाती है या नहीं।
