Credit Card Business: क्या अब बदल जाएगा बैंकों का कमाई का जरिया? EMI पर शिफ्ट हो रहे हैं क्रेडिट कार्ड इश्यूअर्स

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Credit Card Business: क्या अब बदल जाएगा बैंकों का कमाई का जरिया? EMI पर शिफ्ट हो रहे हैं क्रेडिट कार्ड इश्यूअर्स

भारत में क्रेडिट कार्ड का पूरा बिजनेस मॉडल बदल रहा है। अब ग्राहक भारी-भरकम ब्याज से बचने के लिए समय पर बिल चुका रहे हैं, जिससे 'रिवॉल्वर' ग्राहकों की संख्या घट रही है। इसी वजह से बैंक अब प्रॉफिट बनाए रखने के लिए EMI और फीस-आधारित सेवाओं पर जोर दे रहे हैं।

भारत में क्रेडिट कार्ड का कारोबार एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सालों तक बैंकों का यह बिजनेस मॉडल मुख्य रूप से उन ग्राहकों पर टिका था जो अपना बकाया हर महीने रोलओवर करते थे, जिन्हें हम 'रिवॉल्वर' (Revolvers) कहते हैं। ये ग्राहक बैंकों के लिए काफी फायदेमंद होते थे क्योंकि वे भारी-भरकम ब्याज (Interest) चुकाते थे। लेकिन अब यह ट्रेंड तेजी से बदल रहा है।

क्यों कम हो रहे हैं 'रिवॉल्वर'?

आजकल के ग्राहक अधिक वित्तीय रूप से जागरूक हैं और डिजिटल पेमेंट टूल्स के चलते अपने खर्चों को बेहतर ढंग से मैनेज कर रहे हैं। अब अधिकांश लोग हर महीने अपना क्रेडिट कार्ड बिल पूरा चुका रहे हैं। नतीजतन, उन खर्चों का हिस्सा घट रहा है जिनसे बैंकों को मोटा ब्याज मिलता था।

बैंकों की नई रणनीति: EMI और फीस

ब्याज से होने वाली अनिश्चित कमाई से बचने के लिए अब बैंक आक्रामक तरीके से ग्राहकों को बड़े खर्चों को EMI में बदलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। EMI लोन से बैंकों को एक स्थिर और अनुमानित कमाई होती है। इसके अलावा, अपनी मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए बैंक अब जॉइनिंग फीस, एनुअल फीस और मर्चेंट कमीशन जैसे फीस-आधारित रेवेन्यू पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

SBI Cards का उदाहरण

इस बदलाव का असर SBI Cards के आंकड़ों में साफ देखा जा सकता है। कंपनी में रिवॉल्वर रिसीवेबल्स का हिस्सा 2020 की शुरुआत में 40% था, जो अब घटकर मात्र 22% पर आ गया है। जब हम रिवॉल्विंग डेट और EMI लोन दोनों को जोड़ते हैं, तब भी कुल इंटरेस्ट-अर्निंग रिसीवेबल्स में गिरावट आई है।

निवेशकों के लिए सबक

अब निवेशकों को सिर्फ 'स्पेंडिंग वॉल्यूम' नहीं, बल्कि 'अर्निंग क्वालिटी' पर ध्यान देना होगा। कम रिवॉल्वर का मतलब है कम नेट इंटरेस्ट मार्जिन। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि बैंक फीस से होने वाली कमाई और EMI बुक को कितनी कुशलता से बढ़ाते हैं।

साथ ही, कुछ जोखिम भी हैं। अगर आर्थिक दबाव के कारण कंज्यूमर स्पेंडिंग कम होती है, तो EMI कन्वर्जन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, चूंकि EMI लोन असल में क्रेडिट कार्ड पर पर्सनल लोन जैसे होते हैं, इसलिए निवेशकों को 'एसेट क्वालिटी' पर भी नजर रखनी होगी ताकि बैड लोन न बढ़ें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.