सितंबर 2026 में भारतीय बैंकों ने **12.6 लाख** नए क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं, जिससे कुल संख्या **12.53 करोड़** तक पहुंच गई है। फेस्टिव डिमांड को देखते हुए बैंक आक्रामक विस्तार कर रहे हैं, लेकिन निवेशकों के लिए एसेट क्वालिटी पर नजर रखना जरूरी है।
भारत के क्रेडिट कार्ड बाजार में सितंबर 2026 में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। पिछले साल के मुकाबले इसमें 10.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा त्योहारी सीजन से ठीक पहले बैंकों की आक्रामक रणनीति को दर्शाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य कंज्यूमर स्पेंडिंग को भुनाना है।
प्रमुख बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा
इस दौड़ में बड़े प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर बैंक सबसे आगे रहे हैं। HDFC Bank ने इस दौरान 2.8 लाख से अधिक नए कार्ड जारी किए, जबकि Axis Bank ने 2.6 लाख नए कार्ड के साथ कड़ी टक्कर दी। SBI Cards ने भी अपनी पैठ मजबूत करते हुए 2.08 लाख से ज्यादा नए कार्ड जोड़े। इसके अलावा Bank of Baroda और Slice Small Finance Bank जैसे संस्थानों का प्रदर्शन भी इस क्षेत्र में तेजी को बयां करता है।
बैंकों की रणनीति और रिस्क
बैंकों का लक्ष्य कार्ड बेस बढ़ाकर फीस और रिवॉल्विंग क्रेडिट से मिलने वाले ब्याज से अपनी कमाई को बढ़ाना है। हालांकि, क्रेडिट कार्ड अनसिक्योर्ड लोन की श्रेणी में आते हैं, इसलिए इनमें रिस्क ज्यादा होता है। बैंक अब वॉल्यूम बढ़ाने और मजबूत अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
रेगुलेटरी वॉच
Reserve Bank of India (RBI) अनसिक्योर्ड क्रेडिट की इस तेज रफ्तार पर पैनी नजर रखे हुए है। हाल के वर्षों में रेगुलेटर ने बैंकों के लिए रिस्क-वेट नियमों को सख्त किया है ताकि बैंक संभावित डिफॉल्ट के लिए पर्याप्त पूंजी बनाए रखें।
निवेशकों के लिए अब आने वाली तिमाही नतीजों में 'स्लिपेज' (slippages) यानी बैड लोन में बदल रहे कर्ज और कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा। क्या यह विस्तार मुनाफा बढ़ाएगा या बैड लोन का खतरा पैदा करेगा? इसका फैसला मैनेजमेंट की कमेंट्री और आने वाले डेटा से ही साफ हो पाएगा।
