SBI का रिकॉर्डतोड़ तिमाही नतीजा
State Bank of India (SBI) ने Q3 FY26 में इतिहास रच दिया है। बैंक ने ₹21,028 करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा तिमाही नेट प्रॉफिट (Net Profit) दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 24.5% ज्यादा है। इस दमदार परफॉरमेंस का श्रेय क्रेडिट ग्रोथ में तेज़ी, जमाओं (Deposits) को सफलतापूर्वक जुटाने और एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में लगातार सुधार को जाता है। बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेशियो घटकर 2.15% और नेट एनपीए (Net NPA) 0.39% पर आ गया है। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3.36% के मजबूत स्तर पर रहा, हालांकि कुछ रिपोर्टों में यह 3.12% भी बताया गया है। SBI का वेल्थ मैनेजमेंट (Wealth Management) बिज़नेस 2030 तक ₹15 लाख करोड़ AUM (Assets Under Management) का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
Tata Steel: मांग के दम पर शानदार मुनाफा
Tata Steel ने भी Q3 FY26 में कमाल का प्रदर्शन किया। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की तुलना में 723% उछलकर ₹2,689 करोड़ पर पहुंच गया। इसकी मुख्य वजहें भारत में मज़बूत घरेलू मांग, लागत में कमी और यूरोपीय ऑपरेशंस में पिछले साल हुए बड़े राइट-ऑफ (Write-offs) के कारण मिले बेस इफेक्ट (Base Effect) को माना जा रहा है। कंपनी के घरेलू बिज़नेस ने लगभग 23% का EBITDA मार्जिन हासिल किया, जिसमें प्रति टन EBITDA ₹12,000 रहा। यह प्रदर्शन JSW Steel और SAIL जैसे प्रतिस्पर्धियों से काफी बेहतर है। हालांकि, कंपनी का यूरोपीय बिज़नेस अभी भी कमज़ोर मांग और प्राइसिंग प्रेशर (Pricing Pressure) से जूझ रहा है।
कमाई बढ़ी, पर मार्जिन सिकुड़ गए
मज़बूत रेवेन्यू (Revenue) के बावजूद, कई कंपनियों ने मार्जिन पर दबाव महसूस किया है। Sonata Software का नेट प्रॉफिट पिछली तिमाही के मुकाबले 13.1% घटकर ₹104 करोड़ रहा, जबकि रेवेन्यू 45.4% बढ़कर ₹3,081 करोड़ हो गया। इसका मुख्य कारण नई लेबर कोडिंग (Labor Codes) से जुड़े अतिरिक्त पास्ट सर्विस कॉस्ट (Past Service Costs) रहे। कंपनी का EBITDA मार्जिन घटकर 6.5% रह गया, जो पिछली तिमाही में 8.1% था। इसी तरह, Oswal Pumps ने रेवेन्यू में 32.2% की बढ़त के साथ 14% अधिक मुनाफा ₹91.5 करोड़ दर्ज किया, लेकिन EBITDA मार्जिन पिछले साल के 31% से गिरकर 25.3% पर आ गया, जो बढ़ी हुई ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Costs) का संकेत देता है। Sarda Energy & Minerals का नेट प्रॉफिट 3.55% गिरकर ₹190.4 करोड़ रहा, जबकि रेवेन्यू 3.3% कम हुआ और EBITDA में 15.7% की गिरावट आई।
रणनीतिक चालें और विनिवेश की प्रगति
Reliance Consumer Products Ltd. (RCPL) ने ऑस्ट्रेलिया की पेय कंपनी Goodness Group Global में मेजॉरिटी स्टेक (Majority Stake) खरीदकर अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय अधिग्रहण (Acquisition) पूरा किया है, जो नए कंज्यूमर मार्केट्स (Consumer Markets) में विस्तार का संकेत देता है। वहीं, IDBI बैंक के रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment) की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) को शॉर्टलिस्टेड बिडर्स (Shortlisted Bidders) से फाइनेंशियल बिड्स (Financial Bids) मिल गई हैं और उनका मूल्यांकन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि Fairfax India Holdings भी इस रेस में है। Kotak Mahindra Bank ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कोई फाइनेंशियल बिड जमा नहीं की है। सरकार और LIC मिलकर कुल 60.72% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं, जिसकी प्रक्रिया बजट 2020 से चल रही है।
PFC-REC मर्जर: इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में बड़ा कदम
पब्लिक सेक्टर फाइनेंस (Public Sector Finance) में एक बड़े कदम के तौर पर, Power Finance Corporation (PFC) और Rural Electrification Corporation (REC) के बोर्ड ने इन-प्रिंसिपल मर्जर (In-Principle Merger) को मंजूरी दे दी है। यह कदम यूनियन बजट 2026-27 के पब्लिक सेक्टर NBFCs (Non-Banking Financial Companies) के स्केल (Scale) और एफिशिएंसी (Efficiency) को बढ़ाने के लक्ष्य के अनुरूप है। PFC, जिसका P/E 5.48 और मार्केट कैप (Market Cap) ₹1.38 लाख करोड़ है, और REC, जिसका P/E 5.69 और मार्केट कैप करीब ₹1 लाख करोड़ है, मिलकर एक मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग इकाई बनाएंगे। इस खबर पर बाज़ार की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही; PFC के शेयर थोड़े बढ़े, जबकि REC में 6 फरवरी 2026 को गिरावट देखी गई, जो इंटीग्रेशन (Integration) पर निवेशकों की सावधानी को दर्शाता है।
रेगुलेटरी जांच की तेज़ होती तलवार
Go Digit General Insurance पर रेगुलेटरी शिकंजा कसता दिख रहा है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स इंटेलिजेंस (DGGI) ने 5 और 6 फरवरी को कंपनी के यहां सर्च (Search) ऑपरेशन चलाया। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि यह जांच सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट (Central Goods and Services Tax Act) के तहत की जा रही है। यह घटनाक्रम वित्तीय सेवा क्षेत्र में बढ़ते रेगुलेटरी ओवरसाइट (Regulatory Oversight) को दर्शाता है।
सेक्टर-विशिष्ट और मैक्रो इकोनॉमिक संकेत
भारतीय बैंकिंग सेक्टर अपनी बैलेंस शीट को मज़बूत कर रहा है, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो कई दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। हालांकि, बढ़ती डिपॉजिट कॉस्ट (Deposit Costs) के चलते NIM पर दबाव बना हुआ है, जो RBI द्वारा हालिया रेपो रेट (Repo Rate) समायोजन से और बढ़ा है। क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) मज़बूत बनी हुई है, जो रिटेल-ड्रिवन (Retail-Driven) विस्तार से कॉर्पोरेट लेंडिंग (Corporate Lending) की ओर बदलाव दिखा रही है। स्टील सेक्टर में घरेलू मांग मज़बूत रही, लेकिन Q3 FY26 में प्राइसिंग चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर, भारत की अर्थव्यवस्था कंजम्पशन (Consumption) और इन्वेस्टमेंट (Investment) से प्रेरित होकर मज़बूत ग्रोथ की ओर बढ़ रही है, लेकिन ग्लोबल ट्रेड (Global Trade) की अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। Swiggy के Instamart ने अपने फी वेवर कैम्पेन (Fee Waiver Campaign) की सीमित स्वीकार्यता का हवाला देते हुए हैंडलिंग चार्जेज़ (Handling Charges) को फिर से लागू करना शुरू कर दिया है, जो क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) स्पेस में आक्रामक डिस्काउंटिंग (Aggressive Discounting) से पीछे हटने का संकेत है।