ग्लोबल फार्मा कंपनियों के चीन से दूरी बनाने की रणनीति का सीधा फायदा Indian CDMO सेक्टर को मिल रहा है। बायोलॉजिक्स और GLP-1 दवाओं की बढ़ती मांग से शेयरों में तेजी तो है, लेकिन महंगे वैल्यूएशन निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क भी बन रहे हैं।
भारत की कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गेनाइजेशन (CDMO) कंपनियों के शेयरों में इन दिनों गजब की तेजी देखी जा रही है। इनका प्रदर्शन फार्मा इंडेक्स के मुकाबले काफी बेहतर रहा है। इस तेजी के पीछे ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रहा एक बड़ा बदलाव है।
'China+1' और BIOSECURE एक्ट का असर
ग्लोबल फार्मा कंपनियां अब अपनी मैन्युफैक्चरिंग को चीन से शिफ्ट कर रही हैं। अमेरिका के BIOSECURE Act ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है, जिससे चीन की बायोटेक कंपनियों पर लगाम कसी गई है। इसका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिल रहा है। भारतीय कंपनियां अब जटिल दवाओं जैसे कि Biologics और GLP-1 (डायबिटीज और वेट मैनेजमेंट दवाएं) के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल कर रही हैं।
महंगे वैल्यूएशन का रिस्क
तेजी के बीच एक गंभीर बात यह है कि सेक्टर के कई दिग्गज शेयर 60 से 80 के P/E मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं। इसका मतलब है कि निवेशक भविष्य की कमाई के लिए आज काफी प्रीमियम चुका रहे हैं। ऐसे में अगर कंपनियां तिमाही नतीजों में चूक करती हैं या किसी प्रोजेक्ट में देरी होती है, तो शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। मार्केट ने 'परफेक्ट' ग्रोथ को पहले ही प्राइस में शामिल कर लिया है, जिससे गलतियों की गुंजाइश बहुत कम बची है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
फार्मा सेक्टर में रेगुलेटरी चुनौतियां हमेशा बनी रहती हैं। भारतीय कंपनियों को USFDA के कड़े मानकों से गुजरना पड़ता है। किसी भी ऑडिट रिपोर्ट में छोटी सी खराबी प्रोडक्शन रोकने का कारण बन सकती है। निवेशकों को स्टॉक के रोजाना उतार-चढ़ाव के बजाय कंपनी की ऑर्डर बुक, नई कैपेसिटी की कमीशनिंग और क्लाइंट एक्विजिशन की रफ्तार पर नजर रखनी चाहिए।
