मार्जिन ट्रेडिंग का कर्ज जाल (Leverage Trap)
भारतीय ब्रोकरेज कंपनियां मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के जरिए भारी रिस्क उठा रही हैं। Zerodha के को-फाउंडर Nithin Kamath का कहना है कि यह एक बड़ा सिस्टमैटिक खतरा बन सकता है। असल समस्या मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा लेवरेज है, जो मार्केट में थोड़ी सी भी हलचल होने पर तेजी से गिर सकते हैं और सर्किट ब्रेकर्स को हिट कर सकते हैं। Kamath बताते हैं कि निवेशक अपने मौजूदा होल्डिंग्स का इस्तेमाल करके और ज्यादा एक्सपोजर ले रहे हैं। अगर मार्केट अचानक पलटता है, तो ब्रोकर्स के पास अपने दिए हुए पैसे वापस पाने के लिए गिरवी रखी संपत्ति को बेचने का कोई आसान रास्ता नहीं होगा।
नॉन-F&O स्टॉक्स का बढ़ता खतरा
एक बड़ी कमजोरी यह है कि कुल MTF एक्सपोजर का लगभग 50% ऐसे स्टॉक्स में है जो फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में शामिल नहीं हैं। इन स्टॉक्स को F&O इंस्ट्रूमेंट्स की तरह आसानी से हेज नहीं किया जा सकता और इनके अपने लोअर ट्रेडिंग लिमिट तक पहुंचने की संभावना ज्यादा होती है। अगर मार्केट में बड़ी गिरावट आती है, तो ट्रेडिंग रुकने से ब्रोकर्स अपनी गिरवी रखी संपत्ति बेचकर लोन की भरपाई नहीं कर पाएंगे। ऐसे में उन्हें पूरा नुकसान खुद उठाना पड़ेगा।
ब्रोकर स्टेबिलिटी पर दबाव
जहां Zerodha अपनी MTF एक्सपोजर को नेट वर्थ के 25% पर सीमित रखता है, वहीं Kamath का मानना है कि कुछ प्रतिद्वंद्वी कंपनियां रेगुलेटरी मैक्सिमम लिमिट 500% नेट वर्थ के करीब काम कर रही होंगी। वोलाटाइल स्टॉक्स के एक केंद्रित पोर्टफोलियो में इतना बड़ा लेवरेज, मार्केट में व्यापक गिरावट के दौरान इन फर्मों को अस्थिर कर सकता है और यह समस्या पूरे फाइनेंशियल सेक्टर में फैल सकती है। रिस्क मैनेजमेंट टीमों को शॉर्ट-टर्म MTF गेन्स से मिलने वाले प्रॉफिट के बजाय लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी पर फोकस करने की सलाह दी जाती है।
सेक्टर तुलना और पिछली घटनाएं
भारतीय ब्रोकर्स की यह स्थिति हमें दूसरे मार्केट्स की उन घटनाओं की याद दिलाती है जहां क्रेडिट में तेजी, खासकर कम लिक्विड एसेट्स में, ने बड़े फाइनेंशियल संकट पैदा किए थे। हालांकि, MTF एक्सपोजर पर खास ग्लोबल डेटा मिलना मुश्किल है, लेकिन वोलाटाइल एसेट्स में ओवर-लेवरेजिंग के रिस्क अच्छी तरह से डॉक्यूमेंटेड हैं। जो कॉम्पिटिटर्स इसी तरह के MTF प्रोडक्ट्स ऑफर करते हैं, उन्हें भी वैसी ही समस्या हो सकती है अगर उनका रिस्क मैनेजमेंट Zerodha जितना सख्त न हो। रेगुलेटर्स संभवतः इन बढ़ते MTF बुक्स पर बारीकी से नजर रख रहे होंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इंडस्ट्री के पास पर्याप्त कैपिटल बफर है, खासकर मिड-कैप स्टॉक इंडेक्स में हालिया वोलाटिलिटी को देखते हुए।
संभावित नुकसान और एनालिस्ट व्यू
एनालिस्ट्स का कहना है कि बढ़ती ब्याज दरें और संभावित ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन का कॉम्बिनेशन मार्केट में करेक्शन ला सकता है, जिससे Kamath द्वारा बताए गए रिस्क और बढ़ जाएंगे। अगर एक साथ कई मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स अपने सर्किट ब्रेकर्स पर हिट होते हैं, तो बड़े MTF एक्सपोजर वाले ब्रोकर्स को मार्जिन कॉल्स का सामना करना पड़ सकता है, जिसे वे पूरा नहीं कर पाएंगे। इससे फोर्स सेलिंग हो सकती है, जो कीमतों को और नीचे ले जाएगी। जो ब्रोकर्स नॉन-F&O स्टॉक्स में कंसंट्रेटेड पोजीशन से अपने MTF पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई नहीं कर पाए हैं, वे विशेष रूप से कमजोर हो सकते हैं।
