Indian Bonds: ग्लोबल मार्केट में हाहाकार के बीच भारतीय बॉन्ड स्थिर, निवेशक सतर्क

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Bonds: ग्लोबल मार्केट में हाहाकार के बीच भारतीय बॉन्ड स्थिर, निवेशक सतर्क

US Treasuries में भारी गिरावट के बावजूद भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड **6.85%** के आसपास स्थिर बनी हुई है। मजबूत घरेलू मांग के कारण बाजार में मजबूती है, लेकिन RBI की हालिया मिनट्स के बाद इस साल रेट हाईक की आहट से निवेशक सतर्क हो गए हैं।

भारतीय डेट मार्केट ने इस हफ्ते शानदार मजबूती दिखाई है और खुद को ग्लोबल मार्केट की उथल-पुथल से अलग रखा है। जहां US Treasury यील्ड 19 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं और 30-वर्षीय बॉन्ड 5.3% के पार निकल गए हैं, वहीं भारतीय 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड 6.80% से 6.85% के दायरे में स्थिर बना हुआ है। यह स्थिरता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की सक्रिय नीतियों और मजबूत लिक्विडिटी का नतीजा है।

घरेलू मजबूती बनाम ग्लोबल उथल-पुथल

भारतीय बॉन्ड्स की यह स्थिरता घरेलू आर्थिक कारकों के कारण है। विदेशी मुद्रा प्रवाह और मजबूत घरेलू निवेश ने इसे ग्लोबल मार्केट के दबाव से बचाए रखा है। जबकि ग्लोबल मार्केट US फिस्कल डेफिसिट की चिंताओं से जूझ रहे हैं, भारत का फोकस स्थानीय महंगाई और लिक्विडिटी पर है।

हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं। RBI की अगस्त 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मिनट्स से संकेत मिले हैं कि सेंट्रल बैंक का रुख 'हॉकिश' हो रहा है। भले ही रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा गया है, लेकिन महंगाई के जोखिमों को देखते हुए बाजार में साल के अंत तक रेट हाईक की आशंका बढ़ गई है।

फंड मैनेजर्स की नई रणनीति

इस बदलती पॉलिसी को देखते हुए फंड मैनेजर्स अब शॉर्ट-ड्यूरेशन बॉन्ड्स (जो एक साल के भीतर मैच्योर होते हैं) पर दांव लगा रहे हैं। इससे ब्याज दरों में बदलाव का जोखिम कम हो जाता है।

निवेशकों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की गिरावट और वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बड़े रिस्क हैं। आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े और RBI की कमेंट्री ही मार्केट की दिशा तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.