Indian Bond Yields: सिस्टम में **₹5 लाख करोड़** की लिक्विडिटी के बावजूद क्यों नहीं गिर रही बॉन्ड यील्ड?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Bond Yields: सिस्टम में **₹5 लाख करोड़** की लिक्विडिटी के बावजूद क्यों नहीं गिर रही बॉन्ड यील्ड?

बैंकिंग सिस्टम में **₹5 लाख करोड़** की भारी-भरकम लिक्विडिटी मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद सरकारी बॉन्ड यील्ड में गिरावट नहीं आ रही है। बैंक मार्क-टू-मार्केट (MTM) नुकसान के डर से सरकारी सिक्योरिटीज खरीदने से कतरा रहे हैं, जिससे इकॉनमी के लिए कर्ज की लागत ऊंची बनी हुई है।

आमतौर पर बाजार में इतनी अधिक लिक्विडिटी होने पर बॉन्ड की कीमतें बढ़ती हैं और यील्ड घटती है, लेकिन मौजूदा स्थिति पूरी तरह से अलग है। यह विसंगति अब भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।\n\n### बैंक क्यों नहीं दिखा रहे दिलचस्पी?\n\nबैंकों के पीछे हटने की सबसे बड़ी वजह मार्क-टू-मार्केट (MTM) नुकसान का डर है। हाल की तिमाहियों में बैंकों को अपने बॉन्ड पोर्टफोलियो पर लगातार नुकसान झेलना पड़ा है। जब यील्ड की उम्मीदें ज्यादा बनी रहती हैं, तो पुराने बॉन्ड्स की वैल्यू गिर जाती है, जिससे बैंकों को बुक पर नुकसान दिखाना पड़ता है। इसके अलावा, बेसल III (Basel III) के सख्त नियम बैंकों को ऐसी जोखिम भरी संपत्तियों के लिए ज्यादा कैपिटल रखने के लिए मजबूर कर रहे हैं। यही कारण है कि लिक्विडिटी का लाभ यील्ड कर्व के ऊपरी हिस्से तक नहीं पहुँच पा रहा है।\n\n### RBI के सामने दुविधा\n\nभारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने अब एक कठिन स्थिति है। हालांकि महंगाई दर हाल ही में 3% से नीचे आई है, जो विकास को बढ़ावा देने का मौका दे सकती है, लेकिन केंद्रीय बैंक को ग्लोबल दबाव और घरेलू सुस्ती के बीच संतुलन बनाना है। अगर यील्ड नीचे नहीं आती है, तो इसका सीधा असर प्राइवेट इन्वेस्टमेंट साइकिल पर पड़ेगा, जो इकॉनमी के लिए खतरनाक हो सकता है।\n\n### क्या है आगे की राह?\n\nअक्टूबर में होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक में बड़े दरों में बदलाव की संभावना कम है। जानकारों का मानना है कि RBI अब फॉरेक्स सेल-बाय स्वैप (Forex Sell-Buy Swaps) जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। इससे सिस्टम में लिक्विडिटी को बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सकेगा, बिना बॉन्ड यील्ड पर दबाव डाले। फिलहाल, बाजार की नजरें RBI की अगली कमेंट्री और लिक्विडिटी मैनेजमेंट की रणनीति पर टिकी हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.