Indian Bond Yields: RBI के कड़े फैसलों से बॉन्ड यील्ड में उछाल, निवेशकों के लिए क्या हैं मौके?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Bond Yields: RBI के कड़े फैसलों से बॉन्ड यील्ड में उछाल, निवेशकों के लिए क्या हैं मौके?

RBI द्वारा लिक्विडिटी सोखने के लिए लगातार बॉन्ड सेल किए जाने से भारतीय बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है। हालांकि इससे मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, लेकिन शॉर्ट-टर्म कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में अब निवेशकों के लिए नए अवसर बन रहे हैं।

भारतीय बॉन्ड मार्केट में फिलहाल माहौल बदला हुआ है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) सिस्टम से अतिरिक्त लिक्विडिटी कम करने के लिए काफी सक्रिय है। FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम में उम्मीद से कहीं ज्यादा $136 बिलियन आने के बाद, सेंट्रल बैंक सिस्टम से अतिरिक्त कैश निकालने में जुट गया है। इसे संतुलित करने के लिए RBI ने ₹750 बिलियन की ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) बॉन्ड बिक्री की है और 28 सितंबर को ₹250 बिलियन की एक और किश्त तय की गई है।\n\n### वैश्विक दबाव और घरेलू यील्ड\nघरेलू बॉन्ड यील्ड में आई तेजी के पीछे केवल स्थानीय कारण नहीं हैं। 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 7.06% पर पहुंच गई है। वहीं, 3-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड जो अगस्त की शुरुआत में 6.2% थी, वह अब 6.5% हो गई है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं और 10-वर्षीय US ट्रेजरी यील्ड 5% के स्तर को पार कर गई है, जिसने RBI को ब्याज दरों को लेकर 'हॉकिश' रुख अपनाने पर मजबूर किया है।\n\n### कॉर्पोरेट बॉन्ड में वैल्यूएशन का मौका\nफिक्स्ड-इनकम निवेशकों के लिए यह स्थिति एक चुनौती भी है और मौका भी। वर्तमान में AAA-रेटेड 3-वर्षीय कॉर्पोरेट बॉन्ड करीब 7.7% का रिटर्न दे रहे हैं। 1 से 3 साल के सेगमेंट में निवेशकों को रेपो रेट के मुकाबले करीब 250 बेसिस पॉइंट्स का स्प्रेड मिल रहा है। इसका मतलब यह है कि अगर ब्याज दरें तुरंत नहीं गिरती हैं, तो भी बेहतर यील्ड और 'कैरी' की वजह से पोर्टफोलियो में स्थिरता बनी रह सकती है।\n\n### रिस्क और आगे क्या देखना है?\nनिवेशकों को अभी सतर्क रहने की जरूरत है। मार्केट अभी भी महंगाई के आंकड़ों और RBI की भविष्य की पॉलिसी को लेकर संवेदनशील है। अगर ग्लोबल ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंची रहती हैं या कच्चे तेल की कीमतें दबाव बनाती हैं, तो मार्केट में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों की नजरें 28 सितंबर को होने वाली OMO बिक्री और RBI की लिक्विडिटी मैनेजमेंट रणनीति पर टिकी होनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.