ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय सरकारी बॉन्ड्स पर दबाव बढ़ा दिया है। बेंचमार्क 2036 बॉन्ड यील्ड **7.43%** तक पहुंच गई है, जो मार्च 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है। महंगाई के डर से अब निवेशक RBI की दिसंबर मीटिंग में **50 बेसिस पॉइंट** की बड़ी दर बढ़ोतरी की तैयारी कर रहे हैं।
सरकारी बॉन्ड बाजार में बुधवार को जबरदस्त बिकवाली देखी गई। बेंचमार्क 6.94% 2036 बॉन्ड की यील्ड पिछले सत्र के 7.3920% से बढ़कर 7.4352% के स्तर पर पहुंच गई। बॉन्ड मार्केट के नियम के मुताबिक, जब बिकवाली बढ़ती है, तो यील्ड ऊपर जाती है, और यही फिलहाल देखने को मिल रहा है।
क्यों बढ़ रही है टेंशन?
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह है $112 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा कच्चा तेल। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल आयात करता है। तेल की कीमतों में उछाल से ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ती है, जिससे महंगाई (CPI) का आंकड़ा, जो सितंबर में 5.54% था, उसके और ऊपर जाने का खतरा पैदा हो गया है।
RBI की पॉलिसी पर असर
मार्केट में अब चर्चा तेज है कि RBI महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों में और सख्ती ला सकता है। स्वैप मार्केट (Swap Market) में भी संकेत मिल रहे हैं कि दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी में 50 बेसिस पॉइंट का रेट हाइक हो सकता है। फिलहाल 1-year ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप रेट बढ़कर 6.58% और 5-year लिक्विड रेट 6.84% पर पहुंच चुका है।
निवेशकों की नजरें अब RBI की अगली मीटिंग के मिनट्स (Minutes) पर टिकी हैं, ताकि यह पता चल सके कि सेंट्रल बैंक ग्रोथ और महंगाई में से किसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है।
