सरकारी बैंकों का एसेट क्वालिटी में बड़ा सुधार
सरकारी बैंकों (PSBs) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए अपने लोन राइट-ऑफ्स (loan write-offs) में भारी कटौती करते हुए, पिछले 8 सालों का रिकॉर्ड तोड़ा है। बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda), बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) और इंडियन बैंक (Indian Bank) जैसे बैंकों ने अपने राइट-ऑफ्स को FY18, FY16 और FY19 के स्तर से नीचे ला दिया है।
वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक PSBs का एग्रीगेट ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेशियो घटकर 1.93% और नेट एनपीए (Net NPA) रेशियो 0.39% पर आ गया है। ये आंकड़े बैंकिंग सेक्टर के लिए ऐतिहासिक रूप से सबसे कम हैं। बैंकों ने अब सिर्फ बैलेंस शीट साफ करने की बजाय, एसेट्स को रिजोल्यूशन के ज़रिए मैनेज करने पर ज़्यादा फोकस किया है। साथ ही, प्रोविजनिंग कवरेज रेश्यो (PCR) 90% से ऊपर बना हुआ है।
रिकॉर्ड मुनाफे की ओर बढ़ते PSBs
इस शानदार एसेट क्वालिटी के चलते ही PSBs ने FY25-26 में रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है। सभी सरकारी बैंकों का कंबाइंड नेट प्रॉफिट 11.1% बढ़कर ₹1.98 लाख करोड़ के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। यह लगातार चौथा साल है जब बैंकों ने मुनाफा दर्ज किया है। वहीं, क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) भी 12.8% बढ़कर ₹283.3 लाख करोड़ तक पहुंच गई।
वैल्यूएशन (Valuation) के लिहाज़ से देखें, तो सरकारी बैंक अपने प्राइवेट सेक्टर के साथियों की तुलना में काफी आकर्षक दिख रहे हैं। मई 2026 तक, बैंक ऑफ बड़ौदा (P/E ~6.40), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (P/E ~6.60) और पंजाब नेशनल बैंक (P/E ~6.90) का P/E रेशियो, HDFC बैंक (P/E ~15.60), ICICI बैंक (P/E ~16.50) और एक्सिस बैंक (P/E ~15.90) जैसे बड़े प्राइवेट बैंकों की तुलना में काफी कम है।
आगे की राह और संभावित जोखिम
हालांकि, जानकारों का मानना है कि भविष्य में कुछ जोखिम बने हुए हैं। किसी भी बड़े आर्थिक मंदी (Economic Downturn) का असर बढ़ते बैड लोन पर पड़ सकता है। इसके अलावा, प्राइवेट बैंक की तुलना में इन बैंकों के लिए इनोवेशन (Innovation) और रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) में अभी भी सुधार की गुंजाइश है। लेकिन कुल मिलाकर, सरकारी बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट और बेहतर एसेट क्वालिटी उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास के अवसरों का फायदा उठाने के लिए तैयार करती है।