अगस्त के महीने में भारतीय बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) **27 बेसिस पॉइंट** बढ़ गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज को **18 बेसिस पॉइंट** कम किया, जबकि नए लोन पर ब्याज दरें **9 बेसिस पॉइंट** बढ़ा दीं, जिससे उनकी कमाई का दायरा और चौड़ा हो गया है।
मार्जिन में सुधार के पीछे की रणनीति
बैंकों ने अपनी बैलेंस शीट के दोनों तरफ चतुराई से तालमेल बिठाया है। जहां नए रूपी टर्म डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज घटकर 5.67% पर आ गया है, वहीं नए लोन की औसत दर बढ़कर 8.61% हो गई है। इसका सीधा असर बैंकों के मुनाफे पर पड़ रहा है।
प्राइवेट बनाम सरकारी बैंकों का प्रदर्शन
मुनाफे की इस दौड़ में प्राइवेट बैंक थोड़े आक्रामक दिखे। प्राइवेट बैंकों ने अपनी लेंडिंग रेट्स 10 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 9.19% कर दीं, जबकि सरकारी बैंकों ने काफी सावधानी बरतते हुए दरों में सिर्फ 1 बेसिस पॉइंट की मामूली बढ़ोतरी की और इन्हें 7.99% पर रखा। हालांकि, डिपॉजिट रेट्स कम करने के मामले में दोनों ही काफी सक्रिय रहे और उन्होंने लागत घटाने पर पूरा जोर दिया।
लोन की कैटेगरी पर असर
इस बदलाव का असर हर तरह के लोन पर अलग-अलग हुआ है:
- पर्सनल और एजुकेशन लोन: इनके ग्राहकों को अब ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ रहा है, जिनमें क्रमशः 17 और 16 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई है।
- होम और व्हीकल लोन: होम लोन की दरें 2 बेसिस पॉइंट गिरकर 7.61% पर आ गईं। वहीं, व्हीकल लोन की दरों में 19 बेसिस पॉइंट की राहत मिली है।
निवेशकों के लिए क्या है बड़ी बात?
मार्च से लेकर अब तक डिपॉजिट रेट्स में कुल 40 बेसिस पॉइंट की कमी आई है, जबकि लोन रेट्स 21 बेसिस पॉइंट ऊपर चढ़े हैं। अब करीब 68% फ्लोटिंग-रेट लोन 'एक्सटर्नल बेंचमार्क' से जुड़े हैं, जिससे बैंकों की कमाई पर ब्याज दरों के बदलाव का असर बहुत तेजी से दिखता है। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी होगी कि क्या ये महंगी दरें लोन की डिमांड पर कोई असर डालेंगी और क्या बैंक डिपॉजिट जुटाने की गति को बरकरार रख पाएंगे।
