Indian Banks Share Price: बैंकों का जलवा! 18.6% की तूफानी क्रेडिट ग्रोथ, FY27 में दिखेगा दमदार प्रदर्शन

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Banks Share Price: बैंकों का जलवा! 18.6% की तूफानी क्रेडिट ग्रोथ, FY27 में दिखेगा दमदार प्रदर्शन

भारतीय बैंकों ने जून 2026 तक **18.6%** की शानदार ईयर-ऑन-ईयर नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की है, जो पिछले एक दशक का सबसे ऊंचा स्तर है। रिटेल और कॉर्पोरेट की मजबूत मांग के कारण यह वृद्धि देखी गई है, जिससे मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में बैंकों की कमाई बढ़ने की उम्मीद है।

बैंकों की कमाई के लिए अच्छी खबर!

फाइनेंशियल ईयर 2027 की शुरुआत में भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। 30 जून 2026 तक, नॉन-फूड क्रेडिट में 18.6% का ईयर-ऑन-ईयर इजाफा हुआ है। यह वृद्धि, ई-एचडीएफसी मर्जर के प्रभाव को छोड़कर, पिछले एक दशक में सबसे तेज क्रेडिट विस्तार है। यह ग्रोथ रिटेल, सर्विसेज, कॉर्पोरेट लोन और माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) सेगमेंट में भी देखी जा रही है।

डिपॉजिट्स पर फोकस और फंडिंग की रणनीति

क्रेडिट की भारी मांग के बावजूद, बैंक डिपॉजिट जुटाने पर भी पूरा ध्यान दे रहे हैं, जो 13.3% ईयर-ऑन-ईयर बढ़ा है। सबसे खास बात यह है कि सितंबर 2026 तक $50 बिलियन का फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट आने की उम्मीद है। इससे बैंकों की सिस्टम-वाइड डिपॉजिट ग्रोथ में लगभग 1.8% का इजाफा होगा, जो बड़े संस्थानों के लिए एक अहम फंडिंग स्रोत बनेगा।

इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से उम्मीद की जा रही है कि वह फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में रेपो रेट में 25-50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। जिन बैंकों के लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े हैं, उन्हें इस मॉनेटरी पॉलिसी शिफ्ट का फायदा मिल सकता है, क्योंकि इससे वे अपनी ब्याज दरों को जल्दी एडजस्ट कर पाएंगे।

एसेट क्वालिटी और सेक्टर के जोखिम

सेक्टर की एसेट क्वालिटी एक बार फिर शानदार साबित हो रही है। मार्च 2026 तक शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो एक दशक के निचले स्तर 1.8% पर आ गया है। वहीं, नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NNPA) रेशियो फिलहाल 0.4% है, जो सेक्टर की बैलेंस शीट हेल्थ में बड़े सुधार को दर्शाता है।

हालांकि, MSME सेगमेंट में कुछ दबाव देखने को मिल रहा है। इस कैटेगरी में बढ़ा हुआ स्ट्रेस लेंडर्स के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

आने वाली तिमाहियों में बैंकों की ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी इस बात पर निर्भर करेगी कि वे फंड की बढ़ती लागत को कैसे मैनेज करते हैं और अपने करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट (CASA) रेशियो को कैसे बनाए रखते हैं। जैसे-जैसे ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, सस्ते और स्थिर डिपॉजिट्स के लिए प्रतिस्पर्धा तेज होने की संभावना है। निवेशकों को यह देखना होगा कि अलग-अलग बैंक डिपॉजिट जुटाने के दबाव को कैसे झेलते हैं और साथ ही अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स को बनाए रखते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.