Indian Banking Sector: डिपॉजिट में **17.7%** का उछाल, RBI के स्वैप विंडो का दिखा बड़ा असर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Banking Sector: डिपॉजिट में **17.7%** का उछाल, RBI के स्वैप विंडो का दिखा बड़ा असर

भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही काफी दमदार रही है। बैंकों के डिपॉजिट में **17.70%** और क्रेडिट ग्रोथ में **19.09%** की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेजी के पीछे RBI की स्पेशल फॉरेन करेंसी स्वैप विंडो है, जिसने बैंकिंग सिस्टम में **$133 बिलियन** की लिक्विडिटी का संचार किया है।

आंकड़ों की जुबानी

बैंकों के लिए यह आधा साल शानदार रहा है। शेड्यूल्ड बैंकों ने डिपॉजिट में 17.70% और लोन देने (एडवांसेज) में 19.09% की वृद्धि की है। इसकी तुलना में पिछले साल के आंकड़े काफी कमजोर थे, जो क्रमशः 9.93% और 11.27% ही थे।

लिक्विडिटी की असली वजह

इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर 5 जून 2026 को शुरू की गई RBI की स्पेशल फॉरेन करेंसी स्वैप विंडो है। 3 से 5 साल के डिपॉजिट पर अनुकूल हेजिंग लागत मिलने के कारण, जून से अगस्त 2026 के बीच बैंकों के पास $133 बिलियन की भारी पूंजी आई है।

निवेशकों के लिए चिंता का सबब

ग्रोथ तो जबरदस्त है, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर चुनौती बनी हुई है। बैंक डिपॉजिट रेट्स तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन लोन की दरें उस रफ्तार से नहीं बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर बैंकों के Net Interest Margins (NIM) पर पड़ेगा।

इसके अलावा, सरकारी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स के आकर्षक ब्याज दरें भी बैंकों से लिक्विडिटी खींच सकती हैं। फिलहाल क्रेडिट-डिपॉजिट गैप 81 बेसिस पॉइंट्स पर है, जो पिछले साल के 89 बेसिस पॉइंट्स की तुलना में थोड़ा सुधरा है, लेकिन इसे ट्रैक करना बहुत जरूरी है। अब देखना यह होगा कि बैंक इस नए फंड को कितनी कुशलता से इस्तेमाल कर पाते हैं और क्या वे बढ़ती लागत को ग्राहकों पर शिफ्ट कर पाएंगे या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.