AI के खतरे का आकलन
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने देश भर के वित्तीय संस्थानों के साथ बातचीत शुरू कर दी है, जिसका मुख्य उद्देश्य Anthropic के एडवांस्ड AI मॉडल, Mythos, से उत्पन्न होने वाले जोखिमों का पता लगाना है। हाल ही में मुंबई में 29 अप्रैल को हुई एक अहम बैठक में, वरिष्ठ बैंक अधिकारियों और CERT-In के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सॉफ्टवेयर खामियों से सुरक्षा
इस AI की खास क्षमता, यानी सॉफ्टवेयर में खामियां ढूंढने की ताकत, से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करना मुख्य लक्ष्य है। बैंक अपनी प्रणालियों को मजबूत करने के लिए Microsoft और IBM जैसी टेक कंपनियों के साथ साझेदारी पर विचार कर रहे हैं। यह रणनीति ऐसे समय में आई है जब वित्त मंत्रालय ने इस मामले में तीसरे पक्ष की निगरानी को प्राथमिकता दी है, बजाय इसके कि बैंकों को सीधे Mythos तक पहुंच दी जाए, ताकि संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वित्त मंत्रालय और RBI का जोर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बैंक अधिकारियों के साथ एक बैठक की और IBA को एक विस्तृत जोखिम मूल्यांकन करने का निर्देश दिया। बैंकों को विकसित हो रहे साइबर खतरों से लड़ने के लिए अपनी IT प्रणालियों में सुधार करने को कहा गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी Mythos के संभावित प्रभाव को लेकर वैश्विक नियामकों के साथ चर्चा कर रहा है।
AI की बग-हंटिंग पावर पर चिंता
Mythos AI को विशेष रूप से ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर में कमजोरियों का पता लगाने के लिए बनाया गया है। बैंकर इस मॉडल की तेजी से कई बग्स का पता लगाने की क्षमता और वास्तविक समय में (real-time) इन समस्याओं को ठीक करने में आने वाली कठिनाइयों को लेकर चिंतित हैं।
