Indian Banks: त्योहारी ऑफर्स की बौछार, लेकिन RBI की पॉलिसी से पहले बैंकों ने बरती सावधानी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Banks: त्योहारी ऑफर्स की बौछार, लेकिन RBI की पॉलिसी से पहले बैंकों ने बरती सावधानी

त्योहारी सीजन में भारतीय बैंकों ने अपने सालाना लोन कैंपेन शुरू कर दिए हैं। इस बार बैंक ब्याज दरों में बड़ी कटौती के बजाय फीस माफी और क्रेडिट कार्ड ऑफर्स पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। यह सतर्क रुख इसलिए है क्योंकि 7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली RBI की पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी की उम्मीद है।

त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही दिग्गज बैंकों ने ग्राहकों को लुभाने के लिए कमर कस ली है। पिछले सालों के मुकाबले इस बार रणनीति बदली हुई है। HDFC Bank अपने 'Festive Treats' प्रोग्राम को आगे बढ़ा रहा है, तो वहीं State Bank of India पर्सनल, कार और गोल्ड लोन पर प्रोसेसिंग फीस माफ कर रहा है। इसके अलावा, ICICI Bank और Punjab National Bank ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं।

RBI की पॉलिसी और बैंकों का डर

बैंकों की यह सावधानी 7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग के कारण है। बाजार का अनुमान है कि महंगाई को काबू में रखने के लिए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे यह 5.50% के स्तर पर पहुंच जाएगा। इस संभावना को देखते हुए बैंक अपनी नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को सुरक्षित रखना चाहते हैं, इसलिए ब्याज दरों में सीधे कटौती करने के बजाय वे अन्य ऑफर्स का सहारा ले रहे हैं।

ग्रोथ और मार्जिन का दबाव

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में इस फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में क्रेडिट ग्रोथ 19% और डिपॉजिट ग्रोथ 17.3% के आसपास रही है। हालांकि, मैक्रो इकोनॉमिक माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सितंबर के अंत में 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड करीब 7.19% पर बंद हुई है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो बैंकों के पास मौजूद बॉन्ड की वैल्यू गिर जाती है, जिससे ट्रेजरी लॉस का खतरा बना रहता है।

इसके अलावा, फंड्स के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण डिपॉजिट कॉस्ट भी महंगी हो गई है, जिससे बैंकों के पास लेंडिंग रेट्स कम करने की गुंजाइश कम बची है।

निवेशकों के लिए बड़ी बात

शेयरधारकों और मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर अब 7 अक्टूबर की पॉलिसी अनाउंसमेंट पर है। RBI महंगाई और भविष्य की दरों पर क्या रुख अपनाता है, यह बैंकिंग सेक्टर की दिशा तय करेगा। निवेशकों को यह देखना होगा कि बढ़ती ब्याज दरों के बीच बैंक अपनी एसेट क्वालिटी और क्रेडिट डिमांड को कैसे मैनेज करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.