Indian Banks: FCNRB डिपॉजिट्स के जरिए बैंकों ने जुटाए **$127 बिलियन**, लिक्विडिटी की समस्या होगी हल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Banks: FCNRB डिपॉजिट्स के जरिए बैंकों ने जुटाए **$127 बिलियन**, लिक्विडिटी की समस्या होगी हल

जून से अगस्त **2026** के बीच भारतीय बैंकों ने FCNRB (Foreign Currency Non-Resident) डिपॉजिट्स के जरिए **$127 बिलियन** की बड़ी राशि जुटाई है। RBI की हेजिंग पॉलिसी के समर्थन से आई यह नकदी बैंकों के लिए क्रेडिट ग्रोथ और डिपॉजिट के बीच के बढ़ते अंतर को पाटने में मददगार साबित होगी।

भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए यह एक बड़ी राहत है। पिछले कुछ समय से बैंक एक ऐसी समस्या से जूझ रहे थे जहाँ लोन (Credit) की रफ्तार डिपॉजिट्स आने की गति से कहीं ज्यादा तेज थी। इस भारी इनफ्लो ने अब बैंकों को एक जरूरी बफर प्रदान किया है।

RBI की हेजिंग पॉलिसी का कमाल

इस डिपॉजिट उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह RBI की एक खास नीति है। सेंट्रल बैंक ने 3 से 5 साल की अवधि वाले डिपॉजिट्स के लिए हेजिंग का पूरा खर्च खुद उठाने का फैसला किया। इस कदम ने घरेलू बैंकों को डॉलर-डिनॉमिनेटेड अकाउंट्स पर बेहतर इंटरेस्ट रेट्स ऑफर करने की ताकत दी, जिससे विदेशी निवेशक और प्रवासी भारतीय इन अकाउंट्स में पैसा लगाने के लिए आकर्षित हुए।

बैलेंस शीट पर व्यापक असर

हालाँकि मुख्य आंकड़ा $127 बिलियन का है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका बैंकिंग बैलेंस शीट पर असर $190 बिलियन से $220 बिलियन तक हो सकता है। यह लेवरेज के कारण है, क्योंकि कई ग्राहक FCNRB डिपॉजिट्स के बदले लोन लेकर दोबारा निवेश कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

निवेशकों की नजर अब बैंकों के 'नेट इंटरेस्ट मार्जिन' (NIMs) पर होनी चाहिए। बैंक इन फंड्स की लागत को कैसे मैनेज करते हैं, यह उनके मुनाफे को तय करेगा। आने वाली तिमाही नतीजों में 'क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो' (CDR) पर मैनेजमेंट की कमेंट्री काफी अहम होगी। अगर बैंक इस लिक्विडिटी को सही तरीके से अच्छी क्वालिटी वाले लोन एसेट्स में नहीं बदल पाए, तो लंबे समय में मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.