FCNR-B डिपॉजिट स्कीम बंद होने के बाद बैंकों के पास करीब $133 बिलियन की भारी नकदी जमा हो गई है। इस अतिरिक्त पूंजी को ठिकाने लगाने के लिए अब बैंक पर्सनल लोन पोर्टफोलियो को आक्रामक तरीके से बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
लिक्विडिटी का अंबार
31 अगस्त को FCNR-B डिपॉजिट स्कीम बंद होने के बाद बैंकिंग सिस्टम में रिकॉर्ड $133 बिलियन का इनफ्लो आया है। यह आंकड़ा 2013 के मुकाबले लगभग 7 गुना ज्यादा है। बैंकों के पास फिलहाल ₹12 लाख करोड़ से ₹13 लाख करोड़ के बीच अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध है, जिसे बैंक अब पर्सनल लोन के जरिए मार्केट में खपाने की तैयारी कर रहे हैं।
बड़े बैंकों की रणनीति
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, बड़े बैंक पहले ही पर्सनल लोन की रफ्तार तेज कर चुके हैं:
- State Bank of India: पर्सनल क्रेडिट में 15% की सालाना बढ़ोतरी।
- ICICI Bank: इसमें 12.9% का उछाल दर्ज किया गया।
- Axis Bank और Kotak Mahindra Bank की ग्रोथ क्रमशः 6% और 5% रही।
- HDFC Bank: जून 2026 तक इनके कुल रिटेल पोर्टफोलियो में पर्सनल लोन की हिस्सेदारी करीब 30% तक पहुंच चुकी है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि एसेट क्वालिटी पिछले कई क्वार्टर के मुकाबले काफी मजबूत दिख रही है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑपरेशन के जरिए सिस्टम की अतिरिक्त नकदी को सोख रहा है। लिक्विडिटी अभी ₹4.7 लाख करोड़ के स्तर पर बनी हुई है।
निवेशकों के लिए बड़ी बात यह होगी कि क्या लोन की दरों में कटौती से बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव बनेगा? बैंक इस भारी पूंजी को अगले 3 से 4 महीनों में कैसे मैनेज करते हैं, यह आने वाले नतीजों में साफ हो जाएगा।
