भारतीय बैंकों के लिए दूसरी तिमाही बेहद शानदार रहने वाली है। मजबूत क्रेडिट डिमांड के दम पर बैंकों का नेट प्रॉफिट **25.4%** तक उछल सकता है। हालांकि, विदेशी मुद्रा डिपॉजिट के भारी इनफ्लो से मार्जिन पर मामूली दबाव दिख सकता है।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के लिए कमर कस चुका है। अनुमान है कि इस बार बैंकों का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 25.4% तक बढ़ सकता है। इस ग्रोथ की मुख्य वजह क्रेडिट विस्तार है, जो पूरे सिस्टम में करीब 18% की रफ्तार से बना हुआ है।
मार्जिन पर क्यों है दबाव?
बैंकों को हाल ही में $127 बिलियन का बड़ा फंड Foreign Currency Non-Resident (FCNR-B) डिपॉजिट्स के जरिए मिला है। यह लिक्विडिटी तो बढ़ा रहा है, लेकिन इसे तुरंत लोन में नहीं बदला जा सका है। जब तक यह पैसा पूरी तरह से लोन के रूप में नहीं बंटता, यह बैलेंस शीट पर एक 'कॉस्ट' की तरह काम कर रहा है।
इसका सीधा असर Net Interest Margins (NIM) पर पड़ा है:
- प्राइवेट सेक्टर बैंक: इनमें मार्जिन में 7 से 32 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट देखने को मिल सकती है।
- पब्लिक सेक्टर बैंक: ये थोड़े सुरक्षित दिख रहे हैं, जहाँ गिरावट महज 1 से 9 बेसिस पॉइंट्स तक रहने का अनुमान है।
भविष्य की रणनीति
बैंक इस विदेशी फंड का इस्तेमाल अपनी पुरानी महंगी होलसेल देनदारियों (wholesale debts) को चुकाने में कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस स्थिति को सामान्य होने में करीब दो क्वार्टर लगेंगे।
एसेट क्वालिटी की बात करें, तो क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड पोर्टफोलियो में स्ट्रेस अब कम होता दिख रहा है। हालांकि, मानसून की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि कम बारिश का सीधा असर रूरल क्रेडिट साइकिल और किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता पर पड़ सकता है। अब निवेशकों की नजर मैनेजमेंट कमेंट्री और इस फंड के प्रभावी इस्तेमाल पर टिकी है।
