सितंबर 2026 तक भारतीय इन्वेस्टमेंट बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। घरेलू बैंकों ने टॉप-10 इक्विटी लीग टेबल्स में 7 जगह बनाकर पिछले 8 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच स्थानीय संस्थागत निवेशकों का मजबूत सपोर्ट इस तेजी की मुख्य वजह है।
घरेलू बैंकों का नया दबदबा
इक्विटी कैपिटल मार्केट्स का नक्शा पूरी तरह बदल गया है। सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, 7 भारतीय इन्वेस्टमेंट बैंक टॉप 10 की लिस्ट में शामिल हैं, जो बीते 8 सालों में इनका सबसे शानदार प्रदर्शन है। Kotak Mahindra Capital Co. ने 45 ट्रांजैक्शन्स के साथ 9.5% मार्केट शेयर हासिल कर फिर से पहला स्थान प्राप्त कर लिया है।
विदेशी बनाम घरेलू निवेशक
बाजार की तस्वीर बदलने के पीछे मुख्य कारण 'लोकल लिक्विडिटी' है। जहां विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल अब तक $30 बिलियन से ज्यादा के शेयर बेचे हैं, वहीं घरेलू संस्थानों ने $68 बिलियन का निवेश कर बाजार को सहारा दिया है। यही वजह है कि सरकारी कंपनियों के इश्यूज में स्थानीय बैंकों की पकड़ मजबूत हुई है।
ग्लोबल प्लेयर्स पिछड़े
पिछले साल की नंबर वन कंपनी JPMorgan Chase & Co. फिसलकर 12वें नंबर पर आ गई है। दूसरी ओर, IIFL Capital Services Ltd. और ICICI Securities Ltd. ने क्रमशः 37 और 43 डील्स के साथ तीसरा और चौथा स्थान हासिल किया है। फिलहाल Jefferies Group और Citigroup ही टॉप 10 में टिके हुए इकलौते विदेशी नाम हैं।
चुनौतियां और आगामी राह
मार्केट की राह आसान नहीं है। Nifty 50 में इस साल 13% की गिरावट आई है, जिससे नए शेयर सेल की प्राइसिंग पर दबाव है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5.31% पर रहना और Reserve Bank of India द्वारा 25 बेसिस पॉइंट की संभावित रेपो रेट बढ़ोतरी निवेशकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
आने वाले समय में Jio Platforms Ltd. की $3.1 बिलियन की सेल, Avaada Electro Ltd. और Advanta Enterprises Ltd. जैसे बड़े डील्स इन बैंकों की कुशलता की असली परीक्षा लेंगे।
