भारतीय बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी 4.4 साल के उच्चतम स्तर पर है। भारी नकदी को ठिकाने लगाने के लिए बैंक अब 'सेमी-फिक्स्ड होम लोन' जैसे हाइब्रिड प्रोडक्ट्स उतार रहे हैं, ताकि सरकारी बॉन्ड्स के जोखिम से बचकर स्टेबल मार्जिन कमाया जा सके।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर अपनी रिटेल लेंडिंग स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव कर रहा है। बैंकिंग सिस्टम में इस समय लिक्विडिटी 4.4 साल के हाई लेवल पर है, जिसकी बड़ी वजह RBI की FCNR(B) डिपॉजिट स्वैप फैसिलिटी के जरिए आए $136.38 बिलियन का इनफ्लो है।
लिक्विडिटी का सही इस्तेमाल
बैंकों के पास पड़ी अतिरिक्त नकदी को सही जगह निवेश करना एक चुनौती बन गया है। पहले बैंक अपना खाली पैसा सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) में लगाते थे, लेकिन ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के कारण बॉन्ड की कीमतों में रिस्क रहता है। अब बैंक हाइब्रिड होम लोन की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे उन्हें एक निश्चित अवधि के लिए स्टेबल ब्याज मिल सके।
प्रमुख बैंकों का कदम
कई बड़े संस्थानों ने इसे लागू करना शुरू कर दिया है। HSBC ने 7.50% (3 साल) और 8.25% (5 साल) जैसे फिक्स्ड रेट मॉर्गेज ऑप्शन पेश किए हैं। वहीं, Kotak Mahindra Bank ने 65 महीने की अवधि के लिए हाइब्रिड लोन ऑफर लॉन्च किए हैं। ये प्रोडक्ट्स ग्राहकों को अचानक रेट हाइक से बचाते हैं और बैंकों को लंबे समय तक फिक्स्ड यील्ड की गारंटी देते हैं।
मार्जिन पर बढ़ता दबाव
यह कदम भले ही नकदी संभालने में मदद करे, लेकिन बैंकिंग मार्जिन पर दबाव अब भी बरकरार है। वर्तमान में क्रेडिट ग्रोथ 17-18% के करीब है, लेकिन डिपॉजिट ग्रोथ की रफ्तार काफी सुस्त है। कम लागत वाली डिपॉजिट न मिलने से बैंकों को महंगे टर्म डिपॉजिट पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
साथ ही, बाजार के जानकारों का मानना है कि यह लिक्विडिटी का दौर अस्थायी हो सकता है। टैक्स आउटफ्लो और नए IPOs के आने से यह सरप्लस कम हो सकता है। ऐसे में यदि ब्याज दरें तेजी से बढ़ती हैं, तो बैंकों के लिए लॉन्ग टर्म फिक्स्ड लोन बुक का मैनेजमेंट कठिन हो सकता है।
निवेशकों के लिए नजरिया
निवेशकों को अब कंपनियों के Net Interest Margins (NIMs) पर खास नजर रखनी चाहिए। क्या यह नई रणनीति बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी सुधार पाएगी या डिपॉजिट की ऊंची लागत मुनाफे को खा जाएगी? मैनेजमेंट की अगली कमेंट्री और डिपॉजिट बनाम क्रेडिट ग्रोथ का डेटा ही यह तय करेगा कि यह बदलाव गेम-चेंजर साबित होगा या केवल एक छोटी अवधि का समाधान।
