2 अक्टूबर, 2026 से सरकार 'Banking for Youth' कैंपेन शुरू करने जा रही है, जिसका मकसद पब्लिक सेक्टर बैंकों की डिजिटल सर्विस को मॉडर्न बनाना है। यह कदम Fintech कंपनियों से **57%** मार्केट शेयर वापस पाने के लिए उठाया गया है, जबकि बैंकों के लिए **2.7%** की डेलिंक्वेंसी रेट को कंट्रोल करना बड़ी चुनौती होगी।
डिजिटल क्रांति की ओर कदम
पब्लिक सेक्टर बैंकों की रणनीति में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए हैं कि इस कैंपेन का मुख्य उद्देश्य भारत के 40 करोड़ Gen Z ग्राहकों के साथ बैंकिंग का रिश्ता और आधुनिक बनाना है। असल में, ट्रेडिशनल बैंक अब Fintech कंपनियों की रफ्तार के आगे पिछड़ रहे हैं, जिन्होंने अपने आसान इंटरफेस और इंस्टेंट क्रेडिट से युवाओं को अपनी ओर खींच लिया है।
Fintechs का दबदबा और चुनौतियां
अभी छोटे लोन (small-ticket loans) के बाजार में Fintech प्लेटफॉर्म्स का 57% कब्जा है। ये कंपनियां अपने गेमफाइड रिवॉर्ड सिस्टम और मोबाइल-फ्रेंडली ऐप्स के जरिए युवाओं की डेली लाइफ में जगह बना चुकी हैं। वहीं दूसरी तरफ, पुराने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर सरकारी बैंक ग्राहकों को जोड़ने में संघर्ष कर रहे हैं। इस डिजिटल खाई को पाटने के लिए बैंक 'Mera Yuva Bharat' (MY Bharat) पोर्टल का सहारा लेंगे और कॉलेज कैंपस में अपनी पैठ बढ़ाएंगे।
क्रेडिट रिस्क और Finfluencers का असर
हालांकि यह विस्तार जरूरी है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं। साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, युवा उधारकर्ताओं में डेलिंक्वेंसी रेट (Delinquency Rate) 2.7% रही है। अगर बैंक बिना कड़े क्रेडिट असेसमेंट मॉडल के तेजी से लोन बांटते हैं, तो उनकी एसेट क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, एक बड़ी चिंता 68.3% Gen Z युवाओं का है, जो अपने फाइनेंशियल फैसले सोशल मीडिया 'Finfluencers' के कंटेंट के आधार पर ले रहे हैं।
निवेशकों के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बैंक अपनी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को कितनी जल्दी दुरुस्त कर पाते हैं, ताकि वे फिनटेक की चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी एसेट क्वालिटी को भी बरकरार रख सकें।
