Forex में बैंकों का कड़ा रुख: Corporates के लिए बढ़ीं मुश्किलें
विदेशी मुद्रा (Forex) के लेन-देन में Indian Banks अब कॉर्पोरेट ग्राहकों से ज़्यादा विस्तृत डॉक्यूमेंटेशन (documentation) की मांग कर रहे हैं। यह उसी तरह की प्रक्रिया है जो 2020 से पहले देखने को मिलती थी। बैंकों का यह कड़ा कदम, डॉलर की फॉरवर्ड मार्केट में खरीद-बिक्री पर लागू हो रहा है, जो आसान हो चुकी नीतियों से एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।
सिर्फ रेगुलेटरी सुझावों पर अमल करने के बजाय, वित्तीय संस्थान अब और सख्त कदम उठा रहे हैं। इसमें ग्राहकों की विस्तृत जांच, उनके पिछले प्रदर्शन का आकलन और ऐतिहासिक डेटा के आधार पर डॉलर की बुकिंग की सीमा तय करना शामिल है। यह 'संभावित एक्सपोजर' (anticipated exposures) को हेजिंग (hedging) करने के लिए किया जा रहा है। बैंकों के बीच बढ़ी इस व्यापक सावधानी के चलते, डॉलर की कमी और रुपए में खास उतार-चढ़ाव वाले माहौल में, संभावित Foreign Exchange Management Act (FEMA) के उल्लंघनों से बचने का लक्ष्य है।
हाल ही में, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) कॉन्ट्रैक्ट्स पर बैन लगा दिया था और रद्द किए गए डेरिवेटिव ट्रेड की रीबुकिंग की अनुमति नहीं दी थी, जिसने Forex मार्केट को अधिक नियंत्रित करने का संकेत दिया था। हालांकि, बैंक इन सख्त डॉक्यूमेंटेशन जांचों को जोखिम प्रबंधन (risk management) की एक अतिरिक्त परत के तौर पर लागू कर रहे हैं, जो रेगुलेटर्स की स्पष्ट आवश्यकताओं से भी एक कदम आगे है। अब $100 मिलियन तक के ट्रांजैक्शन के लिए भी मज़बूत औचित्य (justification) की ज़रूरत होगी।