Bond Yields का असर: सरकारी बॉन्ड यील्ड **7.19%** पर पहुंची, बैंकिंग सेक्टर का ट्रेजरी मुनाफा **62%** लुढ़का

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AuthorAditya Rao|Published at:
Bond Yields का असर: सरकारी बॉन्ड यील्ड **7.19%** पर पहुंची, बैंकिंग सेक्टर का ट्रेजरी मुनाफा **62%** लुढ़का

सितंबर तिमाही में सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर **7.19%** के स्तर पर पहुंच गई, जिसका सीधा असर बैंकों की ट्रेजरी इनकम पर पड़ा है। इंडस्ट्री का ट्रेजरी मुनाफा **62%** तक गिर गया है, हालांकि SBI और HDFC Bank जैसे बड़े लेंडर्स ने अपनी मजबूत लोन ग्रोथ के दम पर स्थिति को संभाला है।

सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी का सीधा असर बैंकों की बैलेंस शीट पर दिख रहा है। सितंबर 2026 तिमाही में 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 7.19% के स्तर पर पहुंच गई। चूँकि बॉन्ड की कीमतें और यील्ड एक-दूसरे के विपरीत चलते हैं, इसलिए यील्ड बढ़ने से बैंकों के पास मौजूद फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज की वैल्यू गिर गई, जिससे बैंकों को अपने पोर्टफोलियो पर Mark-to-Market (MTM) नुकसान उठाना पड़ा।

आंकड़ों के मुताबिक, बैंकिंग सेक्टर की ट्रेजरी इनकम में साल-दर-साल 62% की गिरावट दर्ज की गई है। इस दबाव के बावजूद, SBI और HDFC Bank जैसे बड़े बैंक अपना मुनाफा बचाने में सफल रहे। इसका मुख्य कारण उनकी मजबूत लोन ग्रोथ और कुछ वन-टाइम स्ट्रैटेजिक गेन्स रहे।

प्रमुख बैंकों का प्रदर्शन:

  • State Bank of India: बैंक ने ₹23,038 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 14.28% ज्यादा है। हालाँकि, इस मुनाफे में ₹7,288 करोड़ का वो मुनाफा भी शामिल है जो SBI Funds Management में हिस्सेदारी बेचने से आया। इस वन-टाइम गेन ने बैंक के ₹1,300 करोड़ के MTM नुकसान की भरपाई कर दी।
  • HDFC Bank: बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹19,510 करोड़ रहा, जिसमें 4.7% की सालाना बढ़त दिखी। वहीं, बैंक की ट्रेजरी ट्रेडिंग गेन्स में 67% की भारी गिरावट देखी गई।

भविष्य की चुनौतियां:

बैंकों के लिए अब अपनी ट्रेजरी से वैकल्पिक आय (Alternative Income) जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है। रुपए डेरिवेटिव्स पर हालिया रेगुलेटरी प्रतिबंधों और जोखिम प्रबंधन के कड़े नियमों के कारण बैंकों के ट्रेडिंग डेस्क की मुनाफा कमाने की क्षमता सीमित हो गई है।

आगामी दिसंबर तिमाही के लिए भी आउटलुक सतर्क है। कच्चे तेल की कीमतें, महंगाई और ग्लोबल ब्याज दरों में अस्थिरता के कारण बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जो आने वाले समय में बैंकों के मार्जिन पर और दबाव डाल सकता है। निवेशक अब नजरें जमाए हुए हैं कि बैंक अपने पोर्टफोलियो को इस माहौल में कैसे रिस्ट्रक्चर करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.