अगले हफ्ते से शुरू हो रहे Q2 अर्निंग सीजन में Indian Banks से मिले-जुले नतीजों की उम्मीद है। जहां नेट प्रॉफिट में जोरदार उछाल देखने को मिल सकता है, वहीं विदेशी करेंसी डिपॉजिट की लागत बढ़ने से नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव की आशंका है।
अगले हफ्ते यानी 12 अक्टूबर 2026 से बैंकिंग सेक्टर के लिए दूसरी तिमाही के नतीजे आने शुरू हो जाएंगे। इस सीजन में HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank जैसे बड़े प्राइवेट लेंडर्स के प्रदर्शन पर सभी की निगाहें टिकी हैं। फिलहाल बाजार में मुनाफा बढ़ने और मार्जिन घटने की दोतरफा चर्चा है।
मुनाफे की रफ्तार और मार्जिन की चुनौती
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बैंकों का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 19.6% से 25.4% तक बढ़ सकता है। इसकी मुख्य वजह 18% से 19% की मजबूत क्रेडिट ग्रोथ है। हालांकि, मुनाफे के ये आंकड़े एक बड़ी चुनौती को छिपा रहे हैं—और वो है नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में गिरावट। कई बैंकों के NIM में 1 से 32 बेसिस पॉइंट्स तक की सिकुड़न आ सकती है।
क्यों दबाव में हैं मार्जिन?
यह सारा खेल Foreign Currency Non-Resident (FCNR-B) डिपॉजिट का है। अगस्त 2026 के अंत तक यह राशि करीब $132.9 बिलियन के स्तर पर पहुंच गई थी। इन फंड्स को जुटाने की लागत ज्यादा रही है, जिसने मार्जिन को प्रभावित किया है। हालांकि, इनका स्पेशल स्वैप विंडो 31 अगस्त 2026 को बंद हो चुका है, जिससे आने वाले समय में स्थिति सुधरने की उम्मीद है।
आगे का रास्ता
मार्केट एक्सपर्ट्स इसे एक अस्थायी दौर मान रहे हैं। उम्मीद है कि बैंक इस सरप्लस लिक्विडिटी को कॉर्पोरेट और रिटेल लोन में निवेश करेंगे, जिससे दूसरी छमाही में मार्जिन स्टेबल हो सकते हैं। निवेशकों को अब मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए, खासकर इस बात पर कि वे महंगे फंड्स को कैसे मैनेज करते हैं और CASA रेशियो को कैसे बचाए रखते हैं। साथ ही, 5.2% का इंफ्लेशन प्रोजेक्शन भी बाजार की नजरों में रहेगा।
