Boston Consulting Group (BCG) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बैंक अगर 'एजेंटिक' (Agentic) AI को अपनाते हैं, तो वे अपना ऑपरेशनल खर्च **40%** तक कम कर सकते हैं और **40 करोड़** नए ग्राहकों को क्रेडिट सुविधा से जोड़ सकते हैं।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर इस वक्त 14.9% के शानदार रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) के साथ ग्लोबल औसत (10.3%) से काफी आगे है। लेकिन, पिछले एक दशक से प्रोडक्टिविटी ग्रोथ महज 1% पर अटकी हुई है। FIBAC 2026 कॉन्फ्रेंस में पेश की गई BCG की रिपोर्ट 'Winning in the AI Era' बताती है कि इसका समाधान 'एजेंटिक' AI सिस्टम में है। सामान्य AI के उलट, ये सिस्टम खुद से काम करने में सक्षम हैं और ऑपरेशनल लागत को 40% से 60% तक कम कर सकते हैं।
क्रेडिट मार्केट का विस्तार
AI का इस्तेमाल सिर्फ खर्च घटाने के लिए नहीं, बल्कि मार्केट बढ़ाने के लिए भी होगा। बैंकों के पास 40 करोड़ ऐसे लोगों को क्रेडिट देने का मौका होगा जो अब तक औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से दूर थे। GST फाइलिंग और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री जैसे वैकल्पिक डेटा का उपयोग करके, बैंक छोटे ग्राहकों को भी लोन दे सकेंगे। इसके अलावा, AI-आधारित अंडरराइटिंग से क्रॉस-सेलिंग के अवसरों में 10% से 20% तक का उछाल आने की संभावना है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और जोखिम
निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि रणनीति और क्रियान्वयन (execution) के बीच एक बड़ा अंतर है। रिपोर्ट के अनुसार, 90% बैंक लीडर्स ने AI रणनीति शुरू तो की है, लेकिन केवल 10% ही इसे पूरी तरह लागू कर पाए हैं।
बैंकों के सामने डेटा की तैयारी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी बड़ी बाधाएं हैं। साथ ही, 60% एग्जीक्यूटिव्स धोखाधड़ी और ऑपरेशनल रिस्क को लेकर चिंतित हैं। तकनीक पर भारी निवेश से शुरुआती खर्च बढ़ सकता है, और साइबर सिक्योरिटी में चूक होने पर नियामक (Regulatory) जांच या वित्तीय नुकसान का जोखिम भी बना रहेगा। भविष्य में बैंकों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे इनोवेशन और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।
