गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बैंकों की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) स्थिर बनी हुई है। इसकी मुख्य वजह असुरक्षित और जोखिम भरे लोन में आई कमी है। माइक्रोफाइनेंस और कंज्यूमर लोन में जहां दबाव कम हुआ है, वहीं अब निवेशकों का फोकस MSME सेक्टर और डिपॉजिट कॉस्ट (Deposit Cost) के कारण बढ़ते मार्जिन प्रेशर पर है।
असुरक्षित लोन में आई कमी
गोल्डमैन सैक्स की एक नई रिपोर्ट ने भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए एक राहत भरी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों ने पिछले 12 से 18 महीनों में जोखिम भरे असुरक्षित लोन (Unsecured Loans) में आक्रामक ग्रोथ पर लगाम कसी है। इसका सीधा असर एसेट क्वालिटी को स्थिर बनाए रखने में मदद कर रहा है।
माइक्रोफाइनेंस (MFI) लोन बुक अपने चरम से 25% तक सिकुड़ गई है। वहीं, कंज्यूमर अनसिक्योर्ड लोन की ग्रोथ भी काफी धीमी होकर वित्तीय वर्ष 2025 और 2026 के लिए 10% से 12% के दायरे में आ गई है, जो पिछले दो वित्तीय वर्षों में 25% से 30% की तेज ग्रोथ से काफी कम है। यह कदम बैंकों को इन सेगमेंट में संभावित दबाव को कंट्रोल करने में मदद कर रहा है।
MSME सेगमेंट पर फोकस
जहां असुरक्षित रिटेल लोन का जोखिम कम हुआ है, वहीं MSME (माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज) सेगमेंट अब विश्लेषकों और निवेशकों के लिए चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है। पिछले कुछ सालों में इस सेक्टर ने 20% से 25% की कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के साथ तेज ग्रोथ दिखाई है। बैंक इन लोन्स के लिए कोलैटरल (Collateral) सुनिश्चित कर रहे हैं, लेकिन ग्रोथ की तेज रफ्तार पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
विश्लेषक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि यह सेक्टर बाहरी दबावों का सामना कैसे करता है। अगर वैश्विक हालात बिगड़ते हैं या घरेलू आर्थिक गतिविधि धीमी होती है, तो MSME सेगमेंट को पेमेंट में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, सरकारी गारंटी (Government Guarantees) कई लोन्स के लिए सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है।
सेक्टर की चुनौतियां और भविष्य
स्थिर एसेट क्वालिटी के बावजूद, बैंकों को प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins), जो लोन्स पर मिलने वाले ब्याज और डिपॉजिट पर दिए जाने वाले ब्याज के बीच का अंतर है, दबाव में है। डिपॉजिट को आकर्षित करने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण फंडिंग कॉस्ट (Funding Costs) ऊंची बनी हुई है, जिससे मार्जिन बढ़ाने की गुंजाइश सीमित हो गई है।
इसके अलावा, एक्सपर्ट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) का फिलहाल प्रभाव कम है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता (Geopolitical Uncertainty) ब्याज दरों और ग्लोबल लिक्विडिटी (Global Liquidity) को प्रभावित कर सकती है।
आने वाले समय में, निवेशक यह समझने के लिए तिमाही नतीजों पर बारीकी से नजर रखेंगे कि बैंक कैसे लोन ग्रोथ और डिपॉजिट मोबिलाइजेशन (Deposit Mobilization) को संतुलित कर रहे हैं। अगले कुछ तिमाहियों के लिए मुख्य रूप से डिपॉजिट ग्रोथ की स्थिरता, नेट इंटरेस्ट मार्जिन का ट्रेंड और MSME लोन बुक के क्रेडिट परफॉर्मेंस पर ध्यान केंद्रित रहेगा।
