बैंकों में फाइव-डे वर्किंग कल्चर लाने के लिए Bank of India के CEO की अगुवाई में एक कमेटी ने औपचारिक चर्चा शुरू कर दी है। इसका मुख्य उद्देश्य बैंकिंग कामकाज को RBI और सरकारी विभागों के शेड्यूल के साथ अलाइन करना है।
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) द्वारा गठित एक हाई-लेवल कमेटी ने बैंकिंग सेक्टर में 5-दिन के वर्किंग वीक के प्रस्ताव पर औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। Bank of India के MD और CEO रजनीश कर्नाटक की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में IBA और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हैं।
नया शेड्यूल और चुनौतियां
बैंक यूनियंस लंबे समय से 5-दिन के कार्य सप्ताह की मांग कर रही हैं। उनका तर्क है कि मौजूदा वर्किंग आवर्स RBI और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज से मेल नहीं खाते। हालांकि, कमेटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसा ऑपरेशनल फ्रेमवर्क तैयार करना है, जिससे स्टाफ को सोमवार से शुक्रवार का शेड्यूल तो मिले, लेकिन ग्राहकों को मिलने वाली बैंकिंग सर्विसेज पर कोई असर न पड़े।
क्या है आगे की प्रक्रिया?
कमेटी को अपनी रिपोर्ट RBI और वित्त मंत्रालय को सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में यह साफ करना होगा कि बैंक महीने के 2 शनिवार की वर्तमान व्यवस्था को कैसे मैनेज करेंगे और नया स्ट्रक्चर कैसे लागू किया जाएगा। अगर कमेटी इस पर अपनी सिफारिश देती है, तो अंतिम मुहर वित्त मंत्रालय और RBI ही लगाएगा।
लेबर रिलेशंस में बदलाव
हाल ही में प्रस्तावित 3-दिवसीय राष्ट्रीय बैंक हड़ताल के रद्द होने के बाद इन चर्चाओं का महत्व बढ़ गया है। यह बैंकिंग सेक्टर में लेबर रिलेशंस को संभालने के तरीके में आए एक बड़े बदलाव का संकेत है। फिलहाल यह मामला चर्चा के चरण में है और लागू होने की कोई आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
