3 अगस्त को लागू हुए नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के बाद से बैंकिंग स्टॉक्स में NSE और BSE के बीच भारी प्राइस गैप देखने को मिल रहा है। IndusInd Bank में **₹33** का अंतर इसका बड़ा उदाहरण है, जिससे आर्बिट्राज कारोबार मुश्किल हो गया है और SEBI भी मामले की जांच कर रहा है।
भारतीय शेयर बाजार में क्लोजिंग प्राइस तय करने के नए तरीके ने बैंकिंग शेयरों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। 3 अगस्त, 2026 को लागू हुए नए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) के बाद से ही NSE और BSE के कीमतों में असामान्य अंतर देखा जा रहा है। 27 अगस्त को IndusInd Bank, AU Small Finance Bank, IDFC First Bank और Federal Bank जैसे शेयरों में दो दशकों का सबसे बड़ा प्राइस गैप दर्ज किया गया।
प्राइस गैप का गणित
इंडसइंड बैंक का उदाहरण लें, तो 27 अगस्त को यह शेयर NSE पर ₹1,002.9 पर बंद हुआ, जबकि BSE पर यह गिरकर ₹970 पर आ गया। ₹33 का यह गैप इस बात का संकेत है कि नया 20 मिनट का ऑक्शन विंडो दोनों एक्सचेंजों के बीच तालमेल बिठाने में संघर्ष कर रहा है।
आर्बिट्राज बना जोखिम भरा
नया सिस्टम पुराने वेटेड एवरेज प्राइस मेथड की जगह लाया गया था, लेकिन इसमें लिक्विडिटी (Liquidity) की कमी दिख रही है। इसकी वजह से आर्बिट्राज ट्रेडर्स के लिए एक एक्सचेंज से खरीदकर दूसरे पर बेचना बेहद जोखिम भरा हो गया है। बाजार की इस अस्थिरता का असर BSE Bankex पर भी पड़ा, जो 27 अगस्त को इंट्रा-डे में 3.3% तक गिर गया था और अंत में 1.7% की गिरावट के साथ बंद हुआ।
SEBI की सख्ती
मामले की गंभीरता को देखते हुए SEBI ने 19 अगस्त को एक अंतरिम आदेश जारी कर JPMorgan Chase & Co. की यूनिट (Copthall Mauritius) और Mansi Share and Stock Broking Ltd. पर बाजार में कारोबार करने से रोक लगा दी है। रेगुलेटर का आरोप है कि 13 अगस्त को क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान इन संस्थाओं ने कीमतों में हेरफेर किया था। फिलहाल बाजार की नजर इस पर टिकी है कि क्या रेगुलेटर ऑक्शन विंडो के नियमों में कोई बड़ा बदलाव करेंगे या लिक्विडिटी सुधारने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।
