Indian Bank के निवेशकों के लिए मिली-जुली खबर है। एक तरफ जहां ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher बैंक के मुनाफे में **20%** की जोरदार ग्रोथ का अनुमान लगा रही है, वहीं दूसरी ओर, बैंक द्वारा **₹10 अरब** के क्रेडिट लॉस Provision के चलते कंपनी के तिमाही नतीजों पर असर पड़ा है।
क्यों है ब्रोकरेज बुलिश?
Prabhudas Lilladher ने Indian Bank पर कवरेज शुरू करते हुए कहा है कि बैंक में लगातार वित्तीय ग्रोथ की अच्छी संभावना है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि बैंक का नेट प्रॉफिट (PAT) फाइनेंशियल ईयर 2026 से 2028 के बीच 20% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ेगा। यह ग्रोथ स्ट्रैटेजी लोन ग्रोथ को बैलेंस करने और क्रेडिट रिस्क को सावधानी से मैनेज करने पर टिकी है।
नतीजों पर Provision का असर
हालिया नतीजों में, बैंक को Expected Credit Loss (ECL) Provision के लिए ₹10 अरब का एक बड़ा अमाउंट अलग रखना पड़ा है। यह कदम भविष्य में संभावित डिफॉल्ट से निपटने के लिए उठाया गया है, जिसने तिमाही के रिपोर्टेड प्रॉफिट को फिलहाल कम कर दिया है। मैनेजमेंट का कहना है कि ECL Provision का कुल इंपैक्ट ₹30 अरब तक जा सकता है। इसके अलावा, बैंक अपने स्टैंडर्ड एसेट्स पर 12 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त Provisionिंग की उम्मीद कर रहा है। हालांकि ये चार्ज फिलहाल प्रॉफिट घटा रहे हैं, लेकिन इनका मकसद भविष्य की अनिश्चितताओं के खिलाफ बैंक की बैलेंस शीट को मजबूत करना है।
ग्रोथ का रोडमैप
Indian Bank अब आक्रामक मार्केट शेयर हासिल करने की बजाय सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि फाइनेंशियल ईयर 2028 तक बैंक 12.5% की लोन ग्रोथ और 11.0% की डिपॉजिट ग्रोथ बनाए रखेगा। बेहतर क्वालिटी वाले एसेट्स पर फोकस करके, बैंक का लक्ष्य 0.9% का कोर रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) हासिल करना है। वहीं, बैंक के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) में भी गिरावट आने की उम्मीद है, जो फाइनेंशियल ईयर 2028 तक घटकर 0.13% तक पहुंच सकते हैं।
निवेशकों के लिए अहम बातें
एक पब्लिक सेक्टर लेंडर के तौर पर, Indian Bank पर लोन की डिमांड को मैनेज करने के साथ-साथ सरकारी क्रेडिट टारगेट को पूरा करने का भी दबाव रहता है। अपने कुछ सरकारी बैंक साथियों की तुलना में, Indian Bank ने स्थिर कमाई का ट्रैक रिकॉर्ड बनाए रखा है। हालांकि, यह हायर Provisioning की जरूरत बताती है कि बैंक एसेट क्वालिटी के संभावित मुद्दों को सक्रिय रूप से संबोधित कर रहा है। निवेशकों की नजर लोन बुक एक्सपेंशन की रफ्तार और आने वाली तिमाहियों में क्रेडिट कॉस्ट को कंट्रोल करने की मैनेजमेंट की क्षमता पर रहेगी।
