Indian Bank Savings: 15 साल में 374% उछाल, ₹65.3 लाख करोड़ तक पहुंची जमा राशि

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Bank Savings: 15 साल में 374% उछाल, ₹65.3 लाख करोड़ तक पहुंची जमा राशि

भारतीय बैंकों में सेविंग्स डिपॉजिट (Savings Deposit) 15 सालों में 374% बढ़कर ₹65.3 लाख करोड़ हो गई है। हालांकि, सालाना ग्रोथ घटकर 3.5% रह गई है, क्योंकि लोग अब इक्विटी मार्केट और इन्वेस्टमेंट फंड्स में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं।

Detailed Coverage

15 सालों में बैंकों में जमा राशि का महा-उछाल

पिछले 15 सालों में भारतीय बैंकों के पास जमा होने वाली सेविंग्स डिपॉजिट (Savings Deposit) में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 तक यह आंकड़ा ₹65.33 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह 2010-11 के ₹13.77 लाख करोड़ के मुकाबले लगभग पांच गुना ज्यादा है। इस ग्रोथ की मुख्य वजह छोटे शहरों में बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को मिली तेजी है।

डोमेस्टिक बैंक जमा जुटाने में सबसे आगे

सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जन धन योजना (Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana) और बड़े ब्रांच नेटवर्क की वजह से डोमेस्टिक भारतीय बैंकों को इस ग्रोथ का सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। इन बैंकों की सेविंग्स डिपॉजिट में इस दौरान 384% की भारी बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, भारत में विदेशी बैंकों, जो ज्यादातर हाई-नेट-वर्थ (High-Net-Worth) ग्राहकों और कॉर्पोरेट बैंकिंग पर ध्यान देते हैं, की सेविंग्स डिपॉजिट में सिर्फ 49% की मामूली ग्रोथ दर्ज की गई।

मार्केट इन्वेस्टमेंट की ओर बढ़ता रुझान

बैंक डिपॉजिट में लंबी अवधि में बढ़ोतरी के बावजूद, हालिया ट्रेंड बता रहा है कि भारतीय अब अपने पैसे को अलग तरह से मैनेज कर रहे हैं। लोग अब ज्यादा रिस्क वाले, मार्केट से जुड़े प्रोडक्ट्स में निवेश कर रहे हैं। मार्च 2025 तक कुल घरेलू वित्तीय संपत्तियों में इक्विटी (Equity) और इन्वेस्टमेंट फंड्स (Investment Funds) का हिस्सा बढ़कर 23% हो गया है, जो मार्च 2019 में सिर्फ 15.7% था। यह स्टॉक मार्केट में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता है, जिनकी संख्या FY20 में 3.1 करोड़ से बढ़कर FY25 में 11 करोड़ से ज्यादा हो गई है।

बैंकों की ग्रोथ में आई कमी

कुल डिपॉजिट राशि भले ही ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर हो, लेकिन इसके बढ़ने की रफ्तार धीमी हो गई है। इस 15 साल की अवधि के पहले दशक में सेविंग्स डिपॉजिट की सालाना ग्रोथ औसतन 14.5% थी। लेकिन महामारी के बाद के सालों में यह ग्रोथ घटकर 8.6% रह गई। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में तो यह ग्रोथ सिर्फ 3.5% रही, जो पिछले डेढ़ दशक में सबसे धीमी रफ्तार है।

बैंकों के लिए, सेविंग्स डिपॉजिट लोन देने के लिए पैसों का एक महत्वपूर्ण और सस्ता जरिया है। मार्च 2025 तक घरेलू क्षेत्र के पास अभी भी सभी बैंक डिपॉजिट का 60.2% हिस्सा है, यह दिखाता है कि ये खाते भारत में पर्सनल फाइनेंस का एक अहम हिस्सा बने हुए हैं। आगे चलकर, निवेशक यह देख सकते हैं कि बैंक कैपिटल मार्केट (Capital Market) द्वारा दिए जा रहे आकर्षक रिटर्न से मुकाबला करने के लिए सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज दरें कैसे एडजस्ट करते हैं, और क्या इक्विटी में निवेश की बढ़ती प्राथमिकता के चलते डिपॉजिट ग्रोथ में यह नरमी जारी रहती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.