Indian Bank अपने मर्चेंट्स को बड़ी राहत देने की योजना बना रहा है। बैंक **15 अक्टूबर, 2026** से **₹2,000** से ज्यादा के UPI ट्रांजेक्शन पर लगने वाली **0.28%** की एक्वायरिंग फीस खुद वहन करने पर विचार कर रहा है।
मर्चेंट्स को राहत देने की कवायद
आगामी 15 अक्टूबर, 2026 से UPI के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने जा रहा है, जिसमें ₹2,000 से ऊपर के P2M ट्रांजेक्शन पर 0.4% MDR चार्ज किया जाएगा। इस दबाव को कम करने के लिए, इंडियन बैंक ने अपने हिस्से की 0.28% फीस खुद चुकाने का मन बनाया है। बैंक का मानना है कि यह कदम उसके मर्चेंट नेटवर्क को मजबूत बनाए रखने में मदद करेगा।
आंकड़ों का गणित और बैंक की रणनीति
बैंक के पास 30 सितंबर, 2026 तक 21.2 लाख P2M और 8.2 लाख P2PM अकाउंट्स हैं। बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष FY27 की पहली छमाही में कुल 32.6 करोड़ UPI ट्रांजेक्शन हुए, जिसमें से केवल 1.6 करोड़ (लगभग 5%) ट्रांजेक्शन ही ₹2,000 के दायरे से ऊपर थे। यही कारण है कि बैंक को इस छूट से फाइनेंशियल बोझ सीमित रहने की उम्मीद है। वहीं, P2PM फ्रेमवर्क के तहत ₹1 लाख मासिक तक की कमाई करने वाले छोटे व्यवसाय इस शुल्क से पूरी तरह बाहर रहेंगे।
निगरानी के लिए नया API
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बैंक एक खास API डेवलप कर रहा है, जो रियल-टाइम में डेटा को मॉनिटर करेगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी मर्चेंट ग्राहकों पर सरचार्ज (Surcharge) न डाले। बैंक ने इसे लेकर सख्त पॉलिसी बनाई है और यह नया मॉनिटरिंग सिस्टम अगले 10 दिनों में पूरी तरह एक्टिव हो जाएगा।
