Indian Bank के लिए अच्छी खबर है! बैंक के एडवांसेज (Advances) में पिछले साल के मुकाबले **13.9%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह रिटेल, एग्रीकलचर और MSME सेक्टरों में शानदार प्रदर्शन रहा है।
रिटेल और MSME से बढ़ा बैंक का बिजनेस
सरकारी बैंक Indian Bank लगातार अपने बिजनेस को बढ़ा रहा है। बैंक की कुल एडवांसेज (Advances) में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 13.9% का इजाफा हुआ है। इस ग्रोथ में रिटेल, एग्रीकलचर और MSME (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा है, जो अब बैंक के डोमेस्टिक लोन बुक का 66% हिस्सा हैं।
दमदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
बैंक का नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) 16.9% बढ़कर ₹7,435 करोड़ हो गया है। लागत-से-आय अनुपात (Cost-to-income ratio) में सुधार हुआ है, जो अब 44.8% पर आ गया है। इस दक्षता के कारण, बैंक का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Profit After Tax) 10.1% बढ़कर ₹3,273 करोड़ रहा।
डिपॉजिट बेस हुआ मजबूत
बैंक का डोमेस्टिक CASA (करंट अकाउंट, सेविंग्स अकाउंट) रेश्यो बढ़कर 39.73% हो गया है, जो पिछले साल 38.97% था। यह दर्शाता है कि बैंक के पास कम लागत वाले डिपॉजिट का अच्छा आधार है। क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो (Credit-Deposit Ratio) 81.06% पर स्थिर है, जो फंड्स के प्रभावी इस्तेमाल का संकेत देता है।
भविष्य की रणनीति और चुनौतियां
Indian Bank ने फाइनेंशियल ईयर 2027 तक के लिए अपना गाइडेंस बरकरार रखा है। बैंक का लक्ष्य रिटर्न ऑन एसेट्स (Return on Assets) और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margin) जैसे प्रमुख मेट्रिक्स में टॉप पर बने रहना है। भविष्य की फंडिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक FCNR (फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट) और ECB (एक्सटर्नल कमर्शियल बोर्रोइंग) के जरिए फंड जुटाने की योजना बना रहा है।
निवेशकों को Expected Credit Loss (ECL) प्रोविजनिंग मॉडल में बदलाव पर नजर रखनी चाहिए, जिसका असर क्रेडिट कॉस्ट पर पड़ सकता है। साथ ही, 2020 में इलाहाबाद बैंक के विलय के बाद से बैंक ने स्थिरता दिखाई है, लेकिन बदलते ब्याज दर माहौल में डिपॉजिट की लागत और लोन पर मिलने वाले ब्याज के बीच संतुलन बनाए रखना लाभ मार्जिन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
