Banking Sector Update: बैंक डिपॉजिट और क्रेडिट ग्रोथ में सुस्ती, RBI के आंकड़ों से क्या संकेत?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Banking Sector Update: बैंक डिपॉजिट और क्रेडिट ग्रोथ में सुस्ती, RBI के आंकड़ों से क्या संकेत?

RBI के 15 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, बैंक डिपॉजिट में गिरावट और क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार धीमी हुई है। बैंक अब मार्जिन बचाने के लिए महंगे बल्क डिपॉजिट से किनारा कर रहे हैं और लो-कॉस्ट फंडिंग पर फोकस बढ़ा रहे हैं।

आंकड़ों की हकीकत

भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए 15 सितंबर को खत्म हुए पखवाड़े के आंकड़े एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। इस दौरान बैंक डिपॉजिट में ₹2.59 लाख करोड़ की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे कुल डिपॉजिट का आंकड़ा ₹276.2 लाख करोड़ पर आ गया। इसी तरह, क्रेडिट ग्रोथ यानी कर्ज बांटने की रफ्तार भी अगस्त के 19.1% से घटकर 18.1% पर आ गई है।

क्यों घटे डिपॉजिट और लोन?

निवेशकों को इसे बैंकिंग सेक्टर की कमजोरी के तौर पर नहीं, बल्कि बैंकों की एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखना चाहिए। बैंक जानबूझकर 'बल्क डिपॉजिट' यानी कॉरपोरेट से आने वाले महंगे फंड से दूरी बना रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को बचाना है। जब बैंक महंगे फंड नहीं लेंगे, तो उन्हें ब्याज के तौर पर कम भुगतान करना पड़ेगा, जिससे उनका मुनाफा सुरक्षित रहेगा।

क्रेडिट वेलोसिटी में आई कमी

इस अवधि में आउटस्टैंडिंग क्रेडिट में भी ₹57,894 करोड़ की गिरावट आई है और यह ₹223.3 लाख करोड़ के स्तर पर है। हालांकि 18.1% की ग्रोथ अभी भी डबल डिजिट में है, लेकिन यह सुस्ती दिखाती है कि बैंक मौजूदा इंटरेस्ट रेट माहौल में संभलकर कदम बढ़ा रहे हैं। राहत की बात यह है कि विदेशी मुद्रा नॉन-रेसिडेंट अकाउंट्स (FCNR) से आने वाले फंड ने लिक्विडिटी के मोर्चे पर बैंकों को सहारा दिया है।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

निवेशकों को यह समझना होगा कि बैंक वॉल्यूम के बजाय प्रॉफिटेबिलिटी को प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि बैंक रिटेल डिपॉजिट को कितनी मजबूती से जुटा पाते हैं। शेयरधारकों को अगली तिमाही के नतीजों में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे लोन डिमांड और फंडिंग के बीच कैसे संतुलन बिठा रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.