Banking Sector: लोन की रफ्तार तेज, डिपॉजिट सुस्त; बैंकों की कमाई पर मंडराया संकट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Banking Sector: लोन की रफ्तार तेज, डिपॉजिट सुस्त; बैंकों की कमाई पर मंडराया संकट

देश के बैंकिंग सेक्टर में लिक्विडिटी का संकट गहराता जा रहा है। 15 अक्टूबर तक बैंकों का क्रेडिट ग्रोथ **17.9%** पर पहुंच गया है, जबकि डिपॉजिट ग्रोथ मात्र **16.6%** रही। यह **1.3%** का अंतर अब बैंक के मार्जिन पर भारी पड़ रहा है।

भारतीय बैंकों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 15 अक्टूबर तक क्रेडिट ग्रोथ 17.9% रही और कुल लोन का आंकड़ा ₹232.54 लाख करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, इसके मुकाबले डिपॉजिट ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही और यह 16.6% के साथ ₹284.37 लाख करोड़ दर्ज की गई।

मुनाफे पर दबाव (Impact on Profitability)

इस गैप को बैंकिंग की भाषा में क्रेडिट-डिपॉजिट (C-D) रेशियो कहा जाता है। जब बैंक डिपॉजिट से ज्यादा पैसा उधार में बांटते हैं, तो उन्हें फंड जुटाने के लिए महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है। इससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर सीधा असर पड़ता है। अगर बैंक लोन पर ब्याज दरें नहीं बढ़ाते, तो उनकी प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफे) पर तगड़ी मार पड़ सकती है।

टर्म डिपॉजिट पर बैंकों का जोर

लिक्विडिटी के गैप को भरने के लिए बैंक अब टर्म डिपॉजिट (फिक्स्ड डिपॉजिट) पर आक्रामक हो रहे हैं। डेटा देखें तो टाइम डिपॉजिट 17.4% बढ़कर ₹250.76 लाख करोड़ हो गए हैं, जबकि करंट और सेविंग अकाउंट्स (CASA) की ग्रोथ केवल 11.1% रही है। हालांकि, लोन ग्रोथ पहले के 19% से घटकर अब 18.2% हुई है, जो इशारा है कि बैंक अब अपनी बैलेंस शीट को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

आने वाले क्वार्टरली नतीजों में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि बैंक डिपॉजिट जुटाने की अपनी रणनीति को कैसे बदल रहे हैं। क्या बैंक अपने मार्जिन को बचा पाएंगे या उन्हें लोन की रफ्तार धीमी करनी पड़ेगी? बैंकिंग सेक्टर के दिग्गज खिलाड़ियों के लिए अपने C-D रेशियो को मैनेज करना ही आने वाले समय में प्रदर्शन का मुख्य आधार होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.