भारतीय बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ में शानदार तेजी देखी जा रही है, जो अब **19%** के करीब पहुंच गई है। इसकी मुख्य वजह बड़ी कंपनियों की ओर से लोन की बढ़ती मांग है, लेकिन डिपॉजिट ग्रोथ की सुस्ती ने बैंकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया है।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर इस समय क्रेडिट विस्तार के एक बड़े दौर से गुजर रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ 18% से 19% के बीच बनी हुई है। इस तेजी के पीछे कॉरपोरेट सेक्टर की भारी मांग है, जो फंडिंग के लिए अब बैंकों पर ज्यादा निर्भर है। हालांकि, यह बिजनेस के लिए तो अच्छा संकेत है, लेकिन बैंकों के लिए 'फंडिंग' का गणित बिगड़ गया है।
डिपॉजिट और लोन का असंतुलन
इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोन देने की रफ्तार डिपॉजिट आने की रफ्तार से काफी तेज है। इसका नतीजा यह हुआ है कि लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो (LDR) बढ़कर करीब 85% तक पहुंच गया है। बैंकों को लोन की डिमांड पूरी करने के लिए डिपॉजिट जुटाने के लिए आपस में होड़ करनी पड़ रही है, जिससे उनकी लागत (Cost of Funds) बढ़ रही है। इसका सीधा असर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर पड़ रहा है।
मुनाफे पर दबाव
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय प्रॉफिटेबिलिटी है। बैंकों को टर्म डिपॉजिट के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है, जिससे उनकी कमाई का मार्जिन सिकुड़ सकता है। हालांकि जून 2026 की तिमाही में बैंकिंग सेक्टर ने एसेट क्वालिटी के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है और नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) 1% से नीचे रहे हैं, लेकिन अब फोकस ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर शिफ्ट हो गया है।
भविष्य के रिस्क और प्रोविजनिंग
आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव 'एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस' (ECL) प्रोविजनिंग फ्रेमवर्क का लागू होना है। नए नियमों के तहत बैंकों को संभावित नुकसान के लिए पहले से ज्यादा कैपिटल अलग रखनी होगी। अनुमान है कि इससे अगले साल क्रेडिट कॉस्ट 0.74% तक बढ़ सकती है। इसके अलावा, अनसिक्योर्ड रिटेल लोन और माइक्रो-एंटरप्राइज सेक्टर पर भी नजर बनाए रखने की जरूरत है। अगर ग्लोबल कमोडिटी कीमतों के चलते महंगाई बढ़ती है, तो ये लोन पोर्टफोलियो रिस्की हो सकते हैं।
अगली कुछ तिमाहियों में निवेशकों को बैंकों की मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे डिपॉजिट जुटाने के लिए क्या नई रणनीति अपनाते हैं और मार्जिन को बचाने के लिए लोन बांटने की रफ्तार पर क्या फैसला लेते हैं।
