Banking Sector Update: क्रेडिट ग्रोथ में जोरदार उछाल लेकिन डिपॉजिट की रफ्तार सुस्त, बैंकों पर बढ़ सकता है दबाव

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AuthorMehul Desai|Published at:
Banking Sector Update: क्रेडिट ग्रोथ में जोरदार उछाल लेकिन डिपॉजिट की रफ्तार सुस्त, बैंकों पर बढ़ सकता है दबाव

देश के बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ **19.4%** की रफ्तार से बढ़ रही है, जबकि डिपॉजिट ग्रोथ केवल **17.8%** रही है। **81%** के क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो ने बैंकों की चिंता बढ़ा दी है।

बढ़ती मांग और घटती लिक्विडिटी का गणित

फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही के आंकड़े बताते हैं कि बैंकों का लोन देने का जोश डिपॉजिट जुटाने की क्षमता से कहीं ज्यादा है। 30 सितंबर, 2026 तक सिस्टम में कुल एडवांस ₹229.9 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है, जबकि कुल डिपॉजिट ₹284 लाख करोड़ के आसपास ही है। इस बड़े अंतर के कारण क्रेडिट-टू-डिपॉजिट (CD) रेशियो 81% के स्तर को छू चुका है, जो इस बात का संकेत है कि बैंक अपनी लिमिट के करीब पहुंच रहे हैं।

RBI का रुख और मार्जिन का रिस्क

7 अक्टूबर, 2026 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है। सेंट्रल बैंक का 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख बताता है कि लिक्विडिटी अब महंगी होने वाली है। इन्वेस्टर्स के लिए बड़ी चुनौती यह है कि अगर बैंक डिपॉजिट जुटाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो उनका नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) दबाव में आ सकता है।

आगे क्या उम्मीद करें?

बीते कुछ महीनों में $133 बिलियन से ज्यादा की विदेशी मुद्रा (FCNR स्कीम) ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी का सपोर्ट दिया था, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि फाइनेंशियल ईयर के अंत तक यह सरप्लस खत्म हो सकता है। ऐसे में बैंकों को डिपॉजिट जुटाने के लिए और आक्रामक होना पड़ेगा। साथ ही, RBI का नया 'एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस' (ECL) फ्रेमवर्क अब लोन की क्वालिटी पर भी बारीक नजर रखेगा, जिससे आने वाली तिमाहियों में बैंकों के मैनेजमेंट की परीक्षा होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.