अगस्त 2026 में भारतीय बैंकों ने क्रेडिट ग्रोथ में **19.1%** का बड़ा उछाल दर्ज किया है। इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर से बढ़ती डिमांड ने इसे रफ्तार दी है, जबकि गोल्ड लोन की चमक अब थोड़ी फीकी पड़ती दिख रही है।
RBI के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बैंकों ने पिछले साल के मुकाबले अगस्त में कुल कर्ज वितरण में 19.1% की जोरदार बढ़ोतरी की है। यह डेटा साफ संकेत देता है कि देश की इकोनॉमी में पैसे का फ्लो अब बदल रहा है। अब बैंक केवल रिटेल लोन पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि बिजनेस और इंडस्ट्रियल सेक्टर से लोन की मांग में तेजी आई है, जो एक संतुलित इकोनॉमी का संकेत है।
इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर में बहार
इंडस्ट्रियल सेक्टर को दिए गए कर्ज में अगस्त के दौरान 18.2% की बढ़ोतरी देखी गई, जो पिछले साल इसी महीने में महज 7% थी। यह एक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग, केमिकल और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख सेक्टरों में दिख रही है। सर्विस सेक्टर में तो कर्ज की रफ्तार और भी तेज रही, जहां 24.3% की बढ़त दर्ज की गई। यह स्पष्ट है कि कंपनियां अपने ऑपरेशंस और विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर खर्च कर रही हैं।
गोल्ड लोन का क्रेज हुआ ठंडा
बीते कुछ समय से गोल्ड-बैक्ड लोन की बेतहाशा ग्रोथ चिंता का विषय बनी हुई थी। हालांकि, अगस्त में इसमें नरमी आई है और यह 83.2% पर आ गया है, जबकि एक साल पहले यह 130.2% के स्तर पर था। रेगुलेटर की सख्ती के बाद बैंक अब पारंपरिक बैंकिंग प्रोडक्ट्स की ओर फिर से फोकस कर रहे हैं। वहीं, एग्रीकल्चर सेक्टर में भी लोन ग्रोथ 17.2% रही, जो पिछले साल के 7.6% के मुकाबले काफी बेहतर है।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि बैंकों का लोन पोर्टफोलियो अब पहले से कहीं ज्यादा डायवर्सिफाइड (Diversified) है। जोखिम अब किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहा। हालांकि, भविष्य के लिए यह देखना जरूरी होगा कि क्या बैंकों के पास इस बढ़ती लोन डिमांड को पूरा करने के लिए पर्याप्त डिपॉजिट्स (Deposits) आ रहे हैं या नहीं।
