इंडियन बैंक ने 5,000 करोड़ रुपये की शेयर बिक्री योजना को फिलहाल टाल दिया है। बैंक का अनुमान है कि क्रेडिट लॉस का असर उम्मीद से कम रहेगा, जिससे वह आंतरिक फंड से खर्चों को पूरा कर सकेगा। इस फैसले से मौजूदा शेयरधारकों को फायदा होगा क्योंकि उनके शेयर का डाइल्यूशन (Dilution) नहीं होगा।
क्यों रद्द हुई 5,000 करोड़ की शेयर बिक्री?
इंडियन बैंक ने 5,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए अपनी शेयर बिक्री की योजना को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है। यह फैसला Expected Credit Loss (ECL) के नए आंतरिक आकलन के बाद लिया गया है। ताजा अनुमानों के मुताबिक, ECL का असर 3,000 करोड़ रुपये से 3,500 करोड़ रुपये के बीच रहने की उम्मीद है। यह शुरुआती अनुमानों से काफी कम है, जो 4,000 करोड़ से 6,000 करोड़ रुपये तक का था और जिसके चलते बाहरी पूंजी की जरूरत महसूस हो रही थी।
आंतरिक फंड से प्रबंधन
मैनेजिंग डायरेक्टर बिनोद कुमार ने स्पष्ट किया कि बैंक को अब Qualified Institutional Placement (QIP) की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह अनुमानित क्रेडिट लॉस को आंतरिक रूप से ही मैनेज कर सकता है। बैंक ने पहले ही 1,000 करोड़ रुपये का फ्लोटिंग प्रोविजन (Floating Provision) अलग रखा है और अतिरिक्त 1,000 करोड़ रुपये आंतरिक कमाई से देने की योजना है। इन जरूरतों को मौजूदा पूंजी और लगातार हो रही कमाई से पूरा करके, बैंक नए शेयर जारी करने की जरूरत से बच रहा है, जिससे मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी कम नहीं होगी।
वित्तीय प्रदर्शन और ग्रोथ
यह फैसला जून 2026 को समाप्त तिमाही के मजबूत नतीजों के बीच आया है। इंडियन बैंक ने 3,273 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के 2,973 करोड़ रुपये की तुलना में 10% अधिक है। बैंक की मुख्य आय, यानी नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income), 17% बढ़कर 7,435 करोड़ रुपये हो गई, जबकि नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) - लाभप्रदता का एक प्रमुख पैमाना - पिछले साल के 3.23% से सुधरकर 3.29% हो गया।
संपत्ति की गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया है, जहां जून 2026 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) अनुपात घटकर 1.86% रह गया, जो पिछले साल 3.01% था। व्यापार का विस्तार भी जारी है, ग्रॉस एडवांसेज़ (Gross Advances) 6.84 लाख करोड़ रुपये और कुल डिपॉजिट (Deposits) 8.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए। बैंक की डिजिटल पहल, जैसे कि mid-2025 में लॉन्च हुआ वर्चुअल बैंकिंग एक्सपीरियंस (VBX) प्लेटफॉर्म, ने इन व्यापारिक आंकड़ों में योगदान दिया है, जिससे 98,000 करोड़ रुपये का बिजनेस हुआ है।
आगे क्या देखना होगा?
शेयर बिक्री रद्द होने से तत्काल इक्विटी डाइल्यूशन तो टल गया है, लेकिन निवेशक बैंक की मार्जिन और संपत्ति की गुणवत्ता को बनाए रखने की क्षमता पर नजर रखेंगे, खासकर बदलती ब्याज दर के माहौल में। अगले कुछ तिमाहियों में क्रेडिट लॉस का वास्तविक प्रभाव और क्या बैंक आंतरिक लाभप्रदता के माध्यम से अपनी ग्रोथ को समर्थन देना जारी रख सकता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। लोन बुक की गुणवत्ता में कोई भी बदलाव या प्रोविजनिंग के लिए नियामक आवश्यकताओं में बड़े बदलाव शेयरधारकों के लिए महत्वपूर्ण कारक होंगे।
